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अनुशासन, धैर्य एवं स्व मूल्यांकन सफलता का मूल मन्त्र : प्रो. राजवंत राव

अपने महत्वपूर्ण उद्बोधन में उन्होंने कहा संतुष्टि सबसे बड़ा गुण है। विश्वविद्यालय में ज्ञान प्राप्त करना और ज्ञान प्राप्त करके अपने को अर्थवान बनाना, समाज के अनुकूल अपने को प्रस्तुत करना तथा अपने शिक्षकों के प्रति कृतज्ञता का भाव रखना आवश्यक है।

कार्यक्रम में समस्त समागतों का स्वागत एवं प्रास्ताविकी विभागीय समन्वयक डॉ देवेन्द्र पाल ने प्रस्तुत की। धन्यवाद ज्ञापन डॉ सूर्यकांत त्रिपाठी ने एवं कार्यक्रम का संचालन एवं संयोजन डॉ ज्ञानधर भारती में किया । इस अवसर पर विभाग के समस्त शिक्षक एवं नवागत छात्र व छात्राएं उपस्थित रहे।