भगवान की बाल लीलाओं का श्रवण कर मंत्रमुग्ध हुए श्रोत्रा
इस दौरान भगवान को 56 भोग समर्पित किए गए। संगीतमय भागवत कथा में भक्तों ने भगवान की भकित् में मग्न हो सुंदर नृत्य किया। भागवत कथा का श्रवण कराते हुए महामण्डलेश्वर आचार्य स्वामी नर्मदाशंकर पुरी महाराज ने कहा कि भगवान कृष्ण के पैदा होने के बाद कंस उनको मौत के घाट उतारने के लिए अपनी राज्य की सर्वाधिक बलवान राक्षसी पूतना को भेजता है। पूतना वेश बदलकर भगवान श्रीकृष्ण को अपने स्तन से जहरीला दूध पिलाने का प्रयास करती है। लेकिन भगवान श्रीकृष्ण उसके प्राणों का हरण कर उसको सदगति प्रदान कर देते हैं।

