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आभूषण का मतलब बट्टू लाल ज्वैलर्स

October 11, 2025


काबिल होने से ज्यादा कामयाब होना आज के दौर में मायने रखता है।
यही बात साबित करती है ला. बट्टू लाल ज्वेलर्स की विरासत साल 1915 में उत्तराखंड के छोटे से शहर रामनगर की एक छोटी सी दुकान से शुरू हुआ ये सिलसिला साल 2016 में दिल्ली एन सी आर में अपने पैर पसार चुका है।
अक्सर लोग व्यवसाय में जोखिम होने की वजह से नौकरी को चुनते है परंतु वह लोग अक्सर ये बात भूल जाते है कि नौकरी एक उम्र तक रहती है और जब आपकी दूसरी पीढ़ी तैयार होती है तो उसे फिर शून्य से शुरू करना पड़ता है
वहीं व्यवसाय में ऐसा कुछ भी नही है
उसी वजह से आज ला. बट्टू लाल सर्राफ जी की छठी पीढ़ी उनके एक छोटे से शहर से शुरू हुए व्यवसाय को दिल्ली तक ले आए है।


करीब बीस ब्रांच के साथ अच्छा खासा व्यवसाय कर रहे है साथ ही लाला जी की ख्याति को एक बड़ा आयाम देने में लगे हुए है।
जब हमारी बात उनके प्रपौत्र से श्री आशीष अग्रवाल जी से हुई
तो उन्होंने बताया कि ये हमारा पुश्तैनी व्यवसाय है।
जिसे पेड़ को हमारे दादा जी के के भी दादा जी ने लगाया था आज उसकी एक ब्रांच साल 2016 में हमारे द्वारा इंदिरापुरम गाजियाबाद में खोली गई थी
साथ ही उन्होंने इस व्यवसाय को सफल होने के पीछे अपनी और अपने पुरखों की मेहनत को तो श्रेय दिया साथ ही साथ ग्राहकों से मिले व्यवसायिक स्नेह और अपने कारीगरों की असली कलाकारी की मुख्य सराहना की!
साथ ही हमने जब उनसे पूछा कि आपके व्यवसाय में ग्रोथ में ऐसा क्या राज़ छुपा है जो आप औरों से ज्यादा बेहतर खुद को साबित कर पाए
तो उन्होंने बड़े ही प्रेम से हमें जवाब दिया कि हमारे पास कुमाऊनी और गढ़वाली आभूषणों का हम मुख्य केंद्र बिंदु है
जिसकी वजह से लोग दूर दूर से हमारे पास ज्वैलरी लेने और ऑर्डर पर बनवाने आते है
वहीं साथ साथ करीब साढ़े तीन सौ तरह के डिजाइन हर एक आभूषण के हमारे पास उपलब्ध रहते है।
फिर जब मैने उनसे पूछा कि जिस तेजी से सोना चांदी महंगा हो रहा है क्या उससे ग्राहकी पर असर हो है
तो उन्होंने दो टूक जबाब देते हुआ कहा स्वर्ण और रजत महिलाओं के लिए खास तौर पर आकर्षण का विषय रहा है
हां यह जरूर है कि दर ज्यादा होने की वजह से कम वजन की वस्तु भले खरीदे पर खरीददार हमेशा ही आयेंगे।
वहीं उन्होंने खुद से हमें एक संदेश जनता के लिए दिया कि भारत सदा से सोने की चूड़ियां है और आभूषण हमारे देश की स्त्रियों का श्रृंगार है और अगर किसी भी चीज़ में श्रृंगार कि कमी होगी तो वह कितनी नीरस लगने लगेगी।
साथ ही उन्होंने लोगों को ये सलाह भी दी निवेश के लिए सोने और चांदी से अच्छा कुछ भी नहीं हो सकता है
क्योंकि सदैव कीमत बढ़ती है |


और आधी रात भी पैसे की जरूरत पड़ने पर आप इसे कही भी तुरंत बिना सोचे समझे बेच सकते है।
और इससे हमारे देश की इकनॉमी को भी बल मिलता है जो देश की अर्थ व्यवस्था के लिए बहुत बड़ा सु अवसर है।
अंततः उन्होंने इस वर्ष अधिक से अधिक स्वर्ण या रजत खरीदने की अपील की क्योंकि आने वाले दो वर्षों में उनका अपना व्यवसायिक अनुमान है कि चांदी ड्योढ़ी और सोना भी लंबी छलांग लगा कर दो लाख के आस पास जा सकता है
अब निर्णय जनता का है कि वह किसका चयन करती हो।
क्योंकि हम अगर बीते बीस वर्ष पीछे जा कर देखे तो जो आज भाव है तब उसका एक चौथाई भाव भी नही था।
साथ अंत में उन्होंने बोला कि हम सदैव व्यवसाय से ज्यादा व्यवहार कमाने पर जोर देते है जिसके लिए हम अपनी गुणवत्ता पर कोई समझौता नही करते है
जिसकी वजह से आज हम यहां तक पहुंच पाएं हैं।

संपादक
आशीष सक्सेना