सिरसा: कालांवाली स्कूल में पहुंची सीबीआई की जांच टीम, खंगाला पुराना रिकार्ड
आरोप है कि मैनुअल दाखिले दिखाकर मिड-डे मील और छात्रवृत्ति का लाभ लिया जा रहा था। साल 2015-16 में एमआईएस पोर्टल पर डेटा अपडेट होने के दौरान यह गड़बड़ी सामने आई थी। जिसको लेकर प्रदेशभर में सीबीआई जांच चल रही है। छात्र रोहित निवासी तख्तमल रोड, मंडी कालांवाली ने बताया कि उक्त अवधि के दौरान वह स्कूल में कक्षा दूसरी में था। इस दौरान वह अपने परिवार के साथ हलवाई के काम के लिए सूरतगढ़ राजस्थान में चला गया था। हालांकि कुछ माह बाद उसने आकर दोबारा स्कूल में नाम दर्ज करवा लिया था और कक्षा नौंवी पास करके पढ़ाई छोड़ दी थी। अब वह डेकोरेशन का काम करता है।
इसी तरह परमजीत कौर निवासी वार्ड नंबर 2 मंडी कालांवाली ने बताया कि उस दौरान उसके दो बच्चे कक्षा पांचवीं में पढ़ाई करते थे।
मजदूरी करने के लिए वो संगरिया राजस्थान में चले गए थे। कुछ माह बाद उन्होंने दोबारा एडमिशन करवाकर आगे की पढ़ाई कर ली थी। उसकी बेटी अंजलि ने कक्षा बारहवीं करके पढ़ाई छोड़ दी और उसके बेटे साहिल ने कक्षा नौवीं करके पढ़ाई छोड़ दी है। इसी तरह मनजीत कौर निवासी वार्ड नंबर 3 मंडी कालांवाली ने बताया कि हमारे संयुक्त परिवार में करीब 7 बच्चे थे और उक्त अविध के दौरान उसकी बेटी ज्योति कक्षा चैथी में थी। बाकी बच्चे राजकीय गल्र्ज मॉडल सांस्कृति सीनियर सैकेंडरी स्कूल कालांवाली में जाने के कारण वहां पर उनके साथ ही एडमिशन करवा दिया था। अब उनकी बेटी उसी स्कूल में कक्षा ग्यारहवीं में पढ़ाई कर रही है।
स्कूल के शिक्षकों ने बताया कि वर्ष 2014-15 के आस-पास स्कूलों में पढ़े विद्यार्थियों को जांच में सत्यापन के लिए बुलाया जा रहा है। करीब 10 साल पहले मिड डे मिल या प्रोत्साहन राशि की सूचनी में जिन विद्यार्थियों के नाम दर्ज थे, अब वो स्कूल छोड़ चुके है। स्कूल का स्टॉफ भी लगभग सारा बदल चुका है, जिसमें कई शिक्षकों का तबादला हो चुका है तो कई रिटायर हो चुके है। उन्होंने बताया कि स्कूल में पहले ही शिक्षकों की कमी है। वे खुद गली-मोहल्लों में जाकर जानकारी जुटा रहे है। इससे बच्चों की पढ़ाई भी बाधित हो रही है। कई बच्चों पहचान भी नहीं आ रही।

