करवा चौथ का पर्व :सुहागिन महिलाओं ने दिनभर निर्जल रहकर व्रत रखा
रात्रि 8 बजकर 27 मिनट पर जैसे ही चंद्रमा का उदय हुआ। सभी व्रती महिलाएं अपने आंगनों और छतों पर उमड़ पड़ीं। पारंपरिक गीतों की गूंज और मंगल ध्वनियों के बीच महिलाओं ने छलनी से चंद्रमा का दर्शन किया, फिर उसी चलनी से अपने पति का मुख देखकर अर्घ्य अर्पित किया। इसके बाद पति के हाथ से जल ग्रहण कर व्रत का पारण किया गया। घर-घर में उत्सव जैसा माहौल रहा। सुहागिनों के साथ परिवार की अन्य महिलाएं और बच्चे भी इस आयोजन में शामिल हुए। शहर के अनेक स्थानों पर सामूहिक करवा चौथ पूजन का आयोजन किया गया, जहां महिलाओं ने एक साथ कथा सुनी और गीत गाए।
इस अवसर पर शहर की गलियों,मंदिरों और सामाजिक स्थलों पर रौनक देखने लायक रही। महिलाओं ने करवा चौथ से जुड़े पारंपरिक गीत सुख सैया का सुमिरन करूं, अखंड सौभाग्य पा लूं…गाए । पूरे दिन भक्ति, सौंदर्य और प्रेम के इस पावन संगम से सुहाग पर्व करवा चौथ का व्रत सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।

