सशस्त्र बल के जवान को व्हाट्सएप से नहीं सीओ के माध्यम से समन भेजना जरूरी-हाईकोर्ट
याचिका में अधिवक्ता राजेन्द्र राठौड़ ने कहा कि याचिकाकर्ता भारतीय सेना में सिपाही के पद पर कार्यरत था और उच्च हिमालयी क्षेत्र में ऑपरेषनल ड्यूटी पर था। इसी दौरान उसकी पत्नी ने भरण पोषण की मांग करते हुए सीआरपीसी की धारा 125 के तहत करौली फैमिली कोर्ट में आवेदन किया। जिस पर फैमिली कोर्ट ने याचिकाकर्ता को तीन बार समन जारी किए, लेकिन उनकी तामील नहीं हो पाई। इसके बाद याचिकाकर्ता के व्हाट्सएप पर समन भेजकर तामील मान ली गई। इसे चुनौती देते हुए कहा गया कि सशस्त्र बल के जवानों पर समन तामील के लिए सीपीसी में विशेष प्रावधान और प्रक्रिया निर्धारित की गई है, लेकिन इस मामले में इस प्रक्रिया का उपयोग नहीं किया गया। वहीं राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता अमित पूनिया ने कहा कि फैमिली कोर्ट ने याचिकाकर्ता को व्हाट्सएप से समन भेजा था और वह उसे मिल भी गया। इसके बावजूद भी उसने जानबूझकर कोर्ट में उपस्थिति दर्ज नहीं कराई। ऐसे में फैमिली कोर्ट की ओर से दिया एक पक्षीय आदेश सही है।

