आईवीआरआई में ओडिशा के अधिकारियों के लिए डेयरी विकास व चारा संवर्धन पर प्रशिक्षण शुरू
कार्यक्रम का उद्घाटन निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त ने किया। उन्होंने कहा कि आईवीआरआई ने पशु स्वास्थ्य व उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं और अब तक पाँच प्रमुख पशु रोगों को देश से समाप्त करने में अहम भूमिका निभाई है। संस्थान ने 50 से अधिक जैव उत्पाद विकसित किए हैं, जिनमें 30 टीके शामिल हैं। उन्होंने बताया कि आईवीआरआई ने वृंदावनी गाय और लेन्डली सूकर जैसी संकर नस्लें विकसित की हैं, जबकि रोहिलखंडी व चौगरखा बकरी का पंजीकरण किया जा चुका है।
संयुक्त निदेशक (प्रसार शिक्षा) डॉ. रूपसी तिवारी ने कहा कि डेयरी क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और संस्थान किसानों तक नवीन तकनीक पहुँचाने के लिए मोबाइल ऐप, पॉडकास्ट और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहा है। उन्होंने प्रतिभागियों से स्थानीय चुनौतियाँ साझा करने को कहा ताकि उन्हें भविष्य के अनुसंधान में शामिल किया जा सके।
पाठ्यक्रम निदेशक डॉ. अनुज चौहान ने बताया कि भारत में दुग्ध उत्पादन पिछले दशक में 146 मिलियन टन से बढ़कर 239 मिलियन टन तक पहुँच गया है। प्रशिक्षण में आधुनिक तकनीक जैसे आईवीएफ, एम्ब्रियो ट्रांसफर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और लंपी स्किन रोग की पीसीआर आधारित जांच पर भी व्याख्यान और प्रायोगिक सत्र होंगे।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. अयोन तरफदार ने किया और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सुमन सेन ने प्रस्तुत किया। मौके पर डॉ. मुकेश सिंह, डॉ. अमित कुमार समेत संस्थान के अधिकारी उपस्थित रहे।

