मुख्यमंत्री से बोले अनिल, मंडी के लिए राहत ही नहीं बल्कि विकास की तरफ भी दें ध्यान
अनिल शर्मा ने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन की बात तो की जाती है मगर यह कैसा व्यवस्था परिवर्तन आपदा राहत वितरण कार्यक्रम में भी चुने हुए विधायकों को नहीं बुलाया गया। मुझे भी कोई निमंत्रण नहीं था मगर एसडीएम सदर ने फोन किया तो वह आ गए। भले ही मैं विधायक भाजपा का हूं मगर स्थानीय होने के कारण वैसे तो मुझे मुख्यमंत्री का स्वागत करना था ऐसा हो न सका। सरकार को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि सता किसी भी पार्टी की हो, ऐसे आयोजनों में बुलाया तो सबको जाना चाहिए था। आपदा कोई बुलाकर नहीं आती न बुलाई जाती है यह किसी को भी आ जाती है। कौल सिंह ठाकुर के दारांग हल्के के स्नोर में उनका भी बागीचा है, चार महीने से सड़क बंद है, बागवानों का करोड़ों का सेब बागीचों में ही सड़ गया मगर सड़क आज दिन तक नहीं खोली गई।
उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार जताया कि उन्होंने पूरी तरह से धाराशायी हो गए मकानों के लिए राहत राशि 7 लाख कर दी है मगर जो मकान रहने लायक नहीं हैं, टेढे हो चुके हैं, उन्हें आंशिक नुकसान श्रेणी में क्यों रखा गया है उन्हें भी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त श्रेणी में रख कर सात सात लाख प्रभावितों को दिए जाएं। उन्होंने कहा कि प्रदेश आपका भी है तो हमारा भी है, पार्टी अलग हो सकती है मगर जनता ने हमें भी चुन कर भेजा है, हमारा भी दायित्व जनता के प्रति बनता है। ऐसे कार्यक्रम बनाए जाने चाहिए जिसमें सभी दल शामिल हों ताकि प्रदेश का हित हो सके।
उन्होंने मंडी जिले के रूके हुए विकास की ओर इशारा करते हुए तंज कसा कि मुख्यमंत्री जी आप केवल राहत बांटने ही मंडी न आएं, विकास के लिए भी मंडी का ध्यान रखें। अनिल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा राहत जैसे कार्यक्रमों किसी को निमंत्रण भेजने की जरूरत नहीं है। भाजपा विधायकों को खुद आना चाहिए था और यहां जो उनके क्षेत्र के आपदा प्रभावित आएं हैं उनके सामने रहना चाहिए था। अनिल को जवाब देते राजस्व मंत्री ने कहा कि इस साल प्रदेश का सेब कारोबार 5 हजार करोड़ का हुआ है। सरकार ने रिकार्ड समय में सड़कें खोल कर बागवानों का सेब मार्केट में भेजने की व्यवस्था की, हो सकता है अनिल शर्मा जैसे कह रहे हैं तो कुछ जगह पर सड़क खुल नहीं पाई हो।

