ओबीसी संघर्ष समिति का अधिवेशन आयोजित, जन जागरण अभियान चलाने का निर्णय
अधिवेशन में 15 से अधिक वक्ताओं ने भाग लेकर सरकार और विपक्ष पर ओबीसी समाज की अनदेखी को लेकर तीखे सवाल उठाए। वक्ताओं ने कहा कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां वर्षों से ओबीसी समाज को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करती आ रही हैं, लेकिन अधिकारों की बात आते ही दोनों की चुप्पी चिंताजनक है।
कार्यक्रम में समिति के प्रदेश महासचिव ने बताया कि वर्तमान में हिमाचल प्रदेश में केवल 25 हजार ओबीसी कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि 27 प्रतिशत आरक्षण के अनुसार यह संख्या 72 हजार होनी चाहिए लेकिन ऐसा नही होना सरकारी तंत्र की उपेक्षा को दर्शाता है।
इस मौके पर मुख्य अतिथि सौरभ कौंडल ने कहा कि ओबीसी समाज अब अपने अधिकारों के लिए निर्णायक लड़ाई लड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार और विपक्ष ने ओबीसी की 20 सूत्रीय मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया, तो आने वाले चुनावों में ओबीसी समाज दोनों दलों का बहिष्कार करेगा। कौंडल ने कहा कि संघर्ष को और तेज किया जाएगा और मंत्री-विधायकों से जवाब मांगा जाएगा।
अधिवेशन के अंत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि ओबीसी संघर्ष समिति अब गांव-गांव जाकर जनजागरण अभियान चलाएगी और अधिकारों की प्राप्ति तक संघर्ष जारी रखेगी।

