Uttarakhand

उत्तराखंड के शिक्षण संस्थानों में मनाया जायेगा ‘वंदे मातरम्’ स्मरणोत्सव

-शिक्षण संस्थानों में आयोजित हो राष्ट्रगीत पर आधारित कार्यक्रम

देहरादून, 7 नवंबर । राष्ट्र गीत ‘वन्दे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में प्रदेशभर के सभी राजकीय एवं निजी शिक्षण संस्थानों में राष्ट्र गीत ‘वन्दे मातरम्’ स्मरणोत्सव मनाया जाएगा। जिसके तहत विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों एवं चिकित्सा शिक्षा महाविद्यालयों व विश्वविद्यालयों में पूरे पखवाड़े विविध कार्यक्रम होंगे। जिनमें रैली, मार्च पास्ट, भाषण, वाद-विवाद प्रतियोगियाएं, गोष्ठियां व विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुतियां शामिल होंगी। इस संबंध में उच्च शिक्षा, विद्यालयी शिक्षा एवं चिकित्सा शिक्षा के अधिकारियों को निर्देश दे दिए गए हैं।

स्वास्थ्य एवं शिक्षा मंत्री डॉ.धन सिंह रावत ने आज कोलकाता से विद्यालयी शिक्षा,उच्च शिक्षा, संस्कृत शिक्षा और चिकित्सा शिक्षा विभाग की वर्चुअली बैठक ली। जिसमें उन्होंने सभी विभागों के अधिकारियों को राष्ट्र गीत ‘वन्दे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में प्रदेशभर के चिकित्सा व शिक्षा क्षेत्र के सभी राजकीय एवं निजी शिक्षण संस्थानों में राष्ट्र गीत ‘वन्दे मातरम्’ स्मरणोत्सव को वृहद स्तर पर मनाने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को 7 नवंबर शुक्रवार से आगामी 26 नवंबर तक सभी शिक्षण संस्थानों में राष्ट्रभावना से प्रेरित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कराने को कहा। पखवाड़ेभर चलने वाले इन कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत वन्देमातरम् की विषय वस्तु के तहत रैली, मार्च पास्ट, कविता पाठ एवं भाषण, निबंध, चित्रकला व पोस्टर, देशभक्ति गीत प्रतियोगिताएं साहित विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम व गोष्ठियां भी आयोजित कराने के निर्देश दिये।

मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी संस्थानों में छात्र-छात्राओं और शिक्षकों की शत-प्रतिशत उपस्थिति एवं सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों और जनसामान्य को भी कार्यक्रमों में आमंत्रित करने पर बल दिया, विशेषकर स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मानित करने के भी ​निर्देश दिए।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि कार्यक्रमों की जानकारी स्थानीय स्तर पर व्यापक रूप से साझा की जाए और केन्द्र सरकार की ओर से विद्यार्थी परिषद का राष्ट्रीय अधिवेशन उत्तराखंड की पावन धरा पर आयोजित होना अत्यंत हर्ष का विषय है। उत्तराखंड की भूमि को देवभूमि कहा जाता है और इस स्थान का भारतीय संस्कृति एवं इतिहास में प्रमुख स्थान है। निश्चित ही ऐसी पावन धरा पर राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ कार्य करने वाले संगठन का यह अधिवेशन सफल और ऐतिहासिक होगा।”