जिले के पुलिस अधिकारियों को फायरिंग रेंज पर दिया गया अश्रु गैस प्रशिक्षण
चार दिनों तक चले इस प्रशिक्षण का उद्देश्य यह था कि किसी भी उपद्रव, भीड़-प्रबंधन, दंगे या तनावपूर्ण स्थिति में पुलिस किस प्रकार न्यूनतम बल का उपयोग करते हुए भीड़ को नियंत्रित या तितर-बितर कर सकती है, उसके बारे में वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर अधिकारियों को दक्ष बनाया जा सके। प्रशिक्षण के दौरान विशेष रूप से यह समझाया गया कि यदि भीड़ या उपद्रवी तत्व कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने का प्रयास करें, तो कैसे समय रहते अश्रु-गैस का प्रभावी उपयोग कर स्थिति को काबू में लाया जाए।
प्रशिक्षुओं को गैस गन, मल्टी-सेल लॉन्चर, योद्धा एवं वज्र वाहन सहित विभिन्न उपकरणों से अश्रु-गैस सेल दागने की विधि का अभ्यास कराया गया। साथ ही, हाथ से फेंके जाने वाले अश्रु-गैस ग्रेनेड को सही दिशा, सही दूरी और उचित स्थान पर लैंड कराने की तकनीक भी समझाई गई, ताकि वास्तविक परिस्थितियों में यह उपकरण अधिकतम प्रभावी साबित हों। प्रशिक्षण सत्रों में पुराने एवं प्रैक्टिस म्यूनिशन का ही उपयोग किया गया और प्रतिदिन अभ्यास समाप्त होने के बाद बचे हुए अवशेषों को सुरक्षा नियमों के तहत नष्ट किया गया।
इस चार दिवसीय प्रशिक्षण में पुलिस इकाई धार के अनुविभागीय अधिकारी पुलिस, रक्षित निरीक्षक पुरुषोत्तम बिश्नोई, सभी थाना प्रभारी तथा उनके सहयोगी पुलिस स्टाफ उपस्थित रहे। सभी को पेशेवर दक्षता, भीड़-नियंत्रण की आधुनिक तकनीकों और असामान्य परिस्थितियों में शांति-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उपयोगी कौशल का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षकों ने यह भी बताया कि ऐसे अभ्यास पुलिस की तैयारी को मजबूत करते हैं और किसी भी प्रमुख आयोजन, विरोध प्रदर्शन या आकस्मिक परिस्थिति में कानून व्यवस्था को प्रभावी ढंग से संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उल्लेखनीय है कि प्रशिक्षण सम्पन्न होने के साथ ही पुलिस अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि इस तरह के अभ्यास न केवल पुलिस बल की कार्यक्षमता बढ़ाते हैं, बल्कि जनता की सुरक्षा और शांति बनाए रखने में भी अहम योगदान देते हैं। धार पुलिस ने स्पष्ट किया कि आगे भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, ताकि जिले की सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत तथा तत्पर हो सके।

