Rajasthan

जेएनवीयू अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी : विदेश नीति के सिद्धांतों और भविष्य की रणनीति पर किया मंथन

जोधपुर, 24 जनवरी । जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के जियोपॉलिटिक्स एंड डिफेंस स्टडी रिसर्च सेल द्वारा आयोजित भारत की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंध: भविष्य की कार्ययोजना विषयक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन आज हुआ।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एमबीएम विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर अजय कुमार शर्मा ने भारतीय विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों का विश्लेषण करते हुए कहा कि ये नीतियां आम आदमी के जीवन को भी प्रभावित करती हैं। उन्होंने विदेशों में रोजगार (फॉरेन जॉब) को लेकर चिंता जाहिर की और कहा कि अब हमें केवल समस्याओं के बजाय उनके समाधान पर ध्यान केंद्रित करना होगा।

विशिष्ट अतिथि के रूप में पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जगमीत बावा ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बदलते आयामों पर चर्चा की, वहीं सेवानिवृत्त राजदूत सुशील कुमार सिंघल ने भारतीय विदेश नीति के मूलभूत सिद्धांतों और वसुधैव कुटुंबकम की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।

समारोह की अध्यक्षता कर रहे कला, शिक्षा एवं समाज विज्ञान संकाय के पूर्व अधिष्ठाता प्रोफेसर किशोरीलाल रैगर ने अपने संबोधन में भारत-पाक विभाजन और युद्ध की विभीषिकाओं के मानवीय पक्ष को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि विभाजन का दर्द और युद्ध के विनाशकारी परिणाम केवल इतिहास के पन्नों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे उस समय के साहित्य में भी गहराई से दृष्टिगोचर होते हैं।

कार्यक्रम के प्रारंभ में राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रोफेसर रामसिंह आढ़ा ने स्वागत उद्बोधन दिया। अंत में आयोजन सचिव एवं निदेशक डॉ. अशोक कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित किया। पूरे सत्र का संचालन डॉ. ललित कुमार पंवार, डॉ. आरती चौपड़ा और अर्जुन सिंह द्वारा किया गया।