Rajasthan

सेवा परिलाभ के लिए नियमित पद पर अस्थाई तौर पर दी गई सेवा अवधि को शामिल करने के आदेश

जयपुर, 29 जनवरी । राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि कोई अस्थाई कर्मचारी स्वीकृत पद पर वर्षो तक नियमित कर्मचारी की तरह निरंतर सेवा देता है और उसे बाद में नियमित करने पर वरिष्ठता, पदोन्नति और पेंशन परिलाभ के लिए पूर्व में की गई सेवा अवधि की गणना की जानी चाहिए। इसके साथ ही अदालत ने मामले में याचिकाकर्ता को प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा में मानते हुए उस आधार पर पदोन्नति, वेतन परिलाभ सहित पेंशन देने को कहा है। जस्टिस गणेश राम मीणा की एकलपीठ ने यह आदेश बाबूलाल मीणा की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।

याचिका में अधिवक्ता विजय पाठक ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता अक्टूबर, 1986 में परिवहन विभाग में दैनिक वेतन भोगी के तौर पर धौलपुर में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी लगा था। राज्य सरकार ने स्वीकृत पद पर उसकी नियुक्ति की थी। इसके बाद वह लगातार विभाग में सेवारत रहा और उसका कई जगहों पर नियमित कर्मचारी की तरह तबादला भी किया गया। इसके बाद साल 1992 में उसे चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के तौर पर नियमित कर दिया गया। याचिका में कहा गया कि सेवा परिलाभों के लिए याचिकाकर्ता की सेवा अवधि की गणना साल 1992 से की गई। जिसके चलते उसे तय समय पर पदोन्नति और चयनित वेतनमान सहित अन्य परिलाभ नहीं मिली। इसके बाद वह सेवा से रिटायर भी हो गया। याचिका में कहा गया कि जिस तरह नियमित कर्मचारी को समय-समय पर तबादला किया जाता है। वैसे ही याचिकाकर्ता को दैनिक वेतन भोगी के तौर पर काम करने के दौरान तबादला किया गया। इसके अलावा उसने हमेशा स्वीकृत पद पर ही काम किया है। ऐसे में सेवा परिलाभ के लिए इस सेवा अवधि की गणना की जानी चाहिए। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने याचिकाकर्ता की सेवा अवधि की गणना प्रथम नियुक्ति तिथि से करने के आदेश दिए हैं।