पद्मश्री सम्मान पर हॉकी इंडिया ने सविता पुनिया और बलदेव सिंह को दी बधाई
हॉकी इंडिया ने भारतीय महिला हॉकी टीम की दिग्गज गोलकीपर सविता पुनिया और पूर्व भारतीय अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी व कोच बलदेव सिंह को प्रतिष्ठित पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किए जाने पर हार्दिक बधाई दी है। यह सम्मान भारतीय हॉकी और खेल जगत में उनके अतुलनीय योगदान के लिए दिया गया है।
भारतीय हॉकी की मजबूत स्तंभ मानी जाने वाली सविता पुनिया ने 20 वर्ष की उम्र में सीनियर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदार्पण किया था और तब से वह दुनिया की सर्वश्रेष्ठ गोलकीपरों में शुमार हैं। अपने धैर्य, निरंतरता और नेतृत्व क्षमता के लिए पहचानी जाने वाली सविता पिछले एक दशक में वैश्विक मंच पर भारतीय महिला हॉकी के पुनरुत्थान का अहम चेहरा रही हैं।
वर्ष 2025 में सविता ने 300 अंतरराष्ट्रीय मैच पूरे कर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की और ऐसा करने वाली पीआर श्रीजेश के बाद दूसरी भारतीय गोलकीपर बनीं, जो उनके लंबे और शानदार करियर को दर्शाता है।
सविता ने टोक्यो ओलंपिक 2020 में भारतीय महिला टीम के ऐतिहासिक चौथे स्थान हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसने विश्व स्तर पर भारतीय महिला हॉकी की पहचान को नई ऊंचाई दी। इसके अलावा, रियो ओलंपिक 2016 और 2018 हॉकी महिला विश्व कप में भी उनका प्रदर्शन अहम रहा, जहां भारत क्वार्टर फाइनल तक पहुंचा।
भारतीय महिला हॉकी टीम की पूर्व कप्तान रहीं सविता के नेतृत्व में टीम ने कई यादगार सफलताएं हासिल कीं। इनमें 2022 बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों का कांस्य पदक, FIH नेशंस कप का खिताब, और 2023 व 2024 महिला एशियन चैंपियंस ट्रॉफी में लगातार दो स्वर्ण पदक शामिल हैं, जो एशिया में भारत के बढ़ते दबदबे को दर्शाते हैं।
उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए सविता को 2018 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा वह हॉकी इंडिया बलबीर सिंह सीनियर प्लेयर ऑफ द ईयर अवॉर्ड (2022, 2023) की दो बार विजेता रह चुकी हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके शानदार प्रदर्शन के चलते उन्हें FIH गोलकीपर ऑफ द ईयर का पुरस्कार तीन लगातार सत्रों (2020–21, 2021–22, 2022–23) में मिला।
वहीं, पूर्व भारतीय अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बलदेव सिंह को खिलाड़ी और कोच दोनों रूपों में हॉकी के प्रति उनके असाधारण योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। उन्होंने 1976 मॉन्ट्रियल ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया और तीन हॉकी विश्व कप खेले — 1971 बार्सिलोना (कांस्य पदक), 1973 एम्स्टर्डम (रजत पदक) और 1978 ब्यूनस आयर्स।
वह 1970 और 1974 एशियाई खेलों में रजत पदक जीतने वाली भारतीय टीम का भी हिस्सा रहे।
खिलाड़ी के रूप में करियर समाप्त करने के बाद बलदेव सिंह भारत के सबसे प्रभावशाली कोचों में से एक बने। उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों का मार्गदर्शन किया, जिनमें ओलंपिक पदक विजेता और पूर्व ड्रैग-फ्लिक विशेषज्ञ संदीप सिंह, पूर्व भारतीय महिला टीम कप्तान रानी रामपाल, साथ ही दीदार सिंह, संजीव कुमार डांग, हरपाल सिंह और नवजोत कौर जैसे नाम शामिल हैं।
कोचिंग और खिलाड़ी विकास में उनके अमूल्य योगदान के लिए उन्हें पहले ही 2009 में द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।
इस अवसर पर हॉकी इंडिया के अध्यक्ष डॉ. दिलीप तिर्की ने कहा,
“सविता और श्री बलदेव सिंह को मिला पद्मश्री सम्मान पूरे हॉकी जगत के लिए गर्व का क्षण है। सविता ने विश्व हॉकी में गोलकीपिंग के मानकों को नई ऊंचाई दी है और 300 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेलना उनकी प्रतिबद्धता और उत्कृष्टता को दर्शाता है। वहीं बलदेव सिंह की खिलाड़ी और कोच के रूप में विरासत अद्वितीय है, जिससे पीढ़ियों ने लाभ उठाया है।”
हॉकी इंडिया के महासचिव भोलानाथ सिंह ने कहा,
“सविता की यात्रा समर्पण और दृढ़ संकल्प की मिसाल है, जो देशभर के युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करती है। बलदेव सिंह ने अपना पूरा जीवन प्रतिभाओं को निखारने और भारतीय हॉकी को जमीनी स्तर से अंतरराष्ट्रीय मंच तक मजबूत बनाने में लगाया है। यह सम्मान पूरी तरह से उनके दशकों के निस्वार्थ योगदान को मान्यता देता है।”

