नया वर्ष, नई उमंगों के साथ चेतना का वसंत महापर्व: डॉ. प्रणव
हरिद्वार, 23 जनवरी । शांतिकुंज में शताब्दी समारोह के अंतर्गत आयोजित वसंतोत्सव महापर्व में गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि यह समय आत्मजागरण और युग परिवर्तन का है। उन्होंने कहा कि वसंतोत्सव और शताब्दी समारोह हमें जड़ता, निराशा और नकारात्मकता को त्यागकर नव संकल्पों के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
यह पर्व व्यक्ति से समाज और समाज से युग निर्माण की यात्रा का उद्घोष है। उन्होंने कहा कि यह सौ वर्षों की साधना का फल है, जिसकी नींव वर्ष 1926 में युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य ने अपने तपस्वी जीवन से रखी थी। उनकी साधना आत्मकल्याण तक सीमित न रहकर संपूर्ण मानवता के लिए प्रकाशपथ बन गई।
डॉ. पण्ड्या ने कहा कि वसंत महापर्व के अवसर पर 40 दिनों का सामूहिक अनुष्ठान प्रारंभ किया जा रहा है, जिसमें साधक आत्मशुद्धि, राष्ट्र-जागरण और विश्व कल्याण के संकल्प के साथ सहभागी बनेंगे। उन्होंने स्वयंसेवकों से इस दिव्य यात्रा में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।
संस्था की अधिष्ठात्री शैलदीदी ने युगऋषि के आध्यात्मिक बोध दिवस के अवसर पर उनके दिव्य जीवन संस्मरणों का भावपूर्ण स्मरण करते हुए कहा कि यह दिवस चेतना के जागरण का प्रतीक है। इस अवसर पर शैलदीदी ने पावन गुरुसत्ता के प्रतिनिधि स्वरूप हजारों नये साधकों को गायत्री महामंत्र की दीक्षा दी।
वैदिक विधि-विधान के साथ सरस्वती पूजन सहित अन्य संस्कार सम्पन्न हुए। देश-विदेश से आए हजारों साधक एवं गणमान्य जन इस अवसर के साक्षी बने।

