स्वयंपाठी विद्यार्थियों से लिया जा रहा ‘विमर्श शुल्क’ विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत निर्धारित: उच्च शिक्षा मंत्री
जयपुर, 18 फ़रवरी । उप मुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने बुधवार को विधानसभा में साफ किया कि मोहनलाल सुखाडिया विश्वविद्यालय, राजऋर्षि भर्तृहरी मत्स्य विश्वविद्यालय तथा राजस्थान विश्वविद्यालय द्वारा स्वयंपाठी विद्यार्थियों से लिया जा रहा ‘विमर्श शुल्क’ संबंधित विश्वविद्यालय अधिनियमों के प्रावधानों के तहत निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा इस शुल्क में प्रत्यक्ष संशोधन किया जाना संभव नहीं है।
प्रश्नकाल के दौरान विधायक मनीष यादव द्वारा पूछे गए पूरक प्रश्नों के जवाब में उच्च शिक्षा मंत्री ने बताया कि संबंधित विश्वविद्यालय अपने-अपने अधिनियमों एवं प्रावधानों के अंतर्गत सक्षम निकायों से अनुमोदन के पश्चात ही स्वयंपाठी विद्यार्थियों से प्रति छात्र 1,000 रुपये विमर्श शुल्क ले रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि शुल्क निर्धारण के मामले में विश्वविद्यालय स्वायत्त हैं।
डॉ. बैरवा ने कहा कि विमर्श शुल्क का उपयोग स्वयंपाठी विद्यार्थियों को हेल्पडेस्क के माध्यम से शैक्षणिक एवं परीक्षा संबंधी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने में किया जाता है। इसके अतिरिक्त इस राशि में भवन एवं अन्य प्रशासनिक व्यय भी सम्मिलित हैं।
इससे पूर्व सदस्य के मूल प्रश्न के लिखित उत्तर में उच्च शिक्षा मंत्री ने तीनों विश्वविद्यालयों द्वारा जारी आदेशों की प्रतियां सदन के पटल पर रखीं। साथ ही विमर्श शुल्क के माध्यम से दी जाने वाली सुविधाओं का विवरण तथा शुल्क लागू होने की तिथि से दिसंबर 2025 तक विश्वविद्यालयवार प्राप्त राशि का वर्षवार ब्यौरा भी प्रस्तुत किया।
उन्होंने जानकारी दी कि विमर्श शुल्क परीक्षा शुल्क का ही हिस्सा होने के कारण परीक्षा मद में प्राप्त समस्त शुल्क राशि का उपयोग विश्वविद्यालय स्तर पर परीक्षा संबंधी विभिन्न कार्यों के लिए किया जाता है। विमर्श संबंधी कार्यों पर होने वाले व्यय के लिए पृथक मद प्रावधानित नहीं है और न ही इसका अलग से लेखा-जोखा संधारित किया जाता है।
उच्च शिक्षा मंत्री ने बताया कि विश्वविद्यालयों में प्राप्त राशि का उपयोग छात्रहित में परीक्षा कार्यों के लिए किया जाता है। विमर्श शुल्क के अनुमोदन संबंधी आदेशों का विवरण भी सदन में रखा गया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों का ऑडिट महालेखाकार, स्थानीय निधि अंकेक्षण विभाग तथा आंतरिक अंकेक्षण के माध्यम से समय-समय पर किया जाता है।

