विधानसभा में चिकित्सा मंत्री का दावा : बुखार से रोबोटिक सर्जरी तक फ्री इलाज, राइट टू हेल्थ पर फिर छिड़ी बहस
जयपुर, 12 फ़रवरी । विधानसभा में गुरुवार को स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर जोरदार चर्चा देखने को मिली। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह ने दावा किया कि सरकार प्रदेशवासियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए पूरी संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है और यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज के जरिए आमजन को वास्तविक ‘स्वास्थ्य का अधिकार’ मिल रहा है।
मंत्री ने सदन में कहा कि मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य (मा) योजना के तहत प्रदेश के 1.36 करोड़ पात्र परिवारों को प्रतिवर्ष 25 लाख रुपये तक का कैशलैस इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि निःशुल्क जांच, दवाइयां, ओपीडी-आईपीडी, आपातकालीन सेवाएं, हीमोडायलिसिस, एम्बुलेंस और ‘मा वाउचर’ जैसी सुविधाओं ने लोगों को इलाज के भारी खर्च से राहत दी है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में लगभग 7 हजार 826 करोड़ रुपये की राशि से लाभ दिया गया है तथा 2,179 उपचार पैकेज योजना में शामिल किए गए हैं। बजट 2026-27 में असहाय, लावारिस और मानसिक विमंदित व्यक्तियों को बिना दस्तावेज भी निःशुल्क इलाज देने की घोषणा को उन्होंने “संवेदनशील पहल” बताया।
प्रश्नकाल के दौरान विधायक हरिमोहन शर्मा के पूरक प्रश्नों के जवाब में मंत्री ने पिछली कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव से ठीक पहले बिना पर्याप्त तैयारी के स्वास्थ्य का अधिकार अधिनियम लागू किया गया। उनके अनुसार, अधिनियम के क्रियान्वयन के लिए नियम नहीं बनाए गए और न ही निजी अस्पतालों व अन्य हितधारकों से समुचित चर्चा की गई।
मंत्री ने यह भी बताया कि अधिनियम के नियमों को लेकर एक चिकित्सक द्वारा उच्च न्यायालय, जयपुर में जनहित याचिका दायर की गई है और इस पर निर्णय अभी लंबित है।
अपने लिखित जवाब में मंत्री ने स्पष्ट किया कि राजस्थान स्वास्थ्य का अधिकार अधिनियम, 2022 को 12 अप्रैल 2023 को अधिसूचित किया गया था और नियमों के निर्माण की प्रक्रिया अभी जारी है। उन्होंने कहा कि अधिनियम के व्यापक प्रभाव, तकनीकी जटिलताओं और विभिन्न हितधारकों से प्राप्त सुझावों का परीक्षण कर नियम तैयार किए जा रहे हैं।

