हमारे विचारों का सतत प्रवाह है मेंटल हैल्थ- डॉ. अमित देव
कोटा, 03 फ़रवरी । वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट डॉ अमित देव ने कहा कि आज की व्यस्त दिनचर्या में हमें शारीरिक एवं मानसिक सेहत के लिये अपनी सोच को हमेशा पॉजिटिव रखना है। मानसिक स्वास्थ्य हमारे मन और मस्तिष्क के विचारों का प्रवाह है। नेगेटिव सोच रखने से हम बीमार जैसा महसूस करने लगते हैं। अपनी दिनचर्या को संतुलित रखते हुये अपना दुख किसी परिचित या मित्र को शेयर करें। इससे आत्मविश्वास बढे़गा।
स्वामी विवेकानंद नगर के ईथॉस हॉस्पिटल में वरिष्ठ नागरिकों की परिचर्चा में डॉ. देव ने कहा कि उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियां भी कमजोर होने लगती है। बुजुर्ग होकर भी आप निरोगी बने रह सकते हैं। आपका शरीर या मस्तिष्क अचानक असंतुलित होने लगे तो रक्त को पिघलाने वाला इंजेक्शन लगवा कर अपना बचाव कर सकते हैं।
उन्होने कहा कि इन दिनों लकवा (ब्रेन स्ट्रोक) के मामले किशोर उम्र में भी सामने आ रहे हैं। आपके हाथ सुन्न हों या बोलने में लडखडाहट होने लगे तो शुरूआत के चार से साढे़ चार घंटे (गोल्डन अवर्स) अहम होते हैं, क्योंकि इस दौरान न्यूरोंस तेजी से खत्म हो जाते हैं। मस्तिष्क में रक्त की नसें बंद होने पर तत्काल किसी विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेकर सही इलाज लें। घर में भोजन की मात्र कम हो, दिन में अधिक बार हल्का भोजन लें। तेल, मिर्च व मीठे खाद्य पदार्थ का सेवन कम करें।
डॉ अमित देव ने बताया कि अचानक तेज सिरदर्द, मानसिक तनाव या माइग्रेन हो तो जांच से उसकी वैरायटी का पता चल जाता है। खाली पेट नहीं रहें। चक्कर आने या उल्टी होने पर किसी विशेषज्ञ को दिखायें। आहार में चना, पनीर, नट्स या मेवा आदि नहीं लेकर खजूर, अंजीर, किशमिश का सेवन कर सकते हैं। हमें सदैव चलते रहना है यह सोचकर रोज सुबह या शाम को गहरी सांस लेते हुये हल्की पैदल सैर एवं योगा-प्राणायाम करें। इससे हैप्पी हार्मोंस निकलेंगे और आप स्वस्थ महसूस करने लगेंगे। नियमित मार्निंग वॉक करने से डिप्रेशन कम हो जाता है।
एक सवाल के जवाब में डॉ देव ने कहा कि एपीलेप्सी या मिर्गी होने पर हाथ-पैर में कंपन्न होने लगता है। निरंतर सही उपचार लेने पर 70 से 80 प्रतिशत मिर्गी रोगी 3-4 साल में स्वस्थ हो जाते हैं। 20 प्रतिशत गंभीर रोगियों को दवा के बाद भी दोबारा मिर्गी आ सकती है। कुछ रोगियों में सोडियम की कमी हो जाती है। इनके लिये 70 प्रतिशत सेंधा व 30 प्रतिशत सामान्य नमक मिलाकर सेवन करें। उन्होंने किशोर, युवा एवं महिलाओं से कहा कि वे अंधेरे में टीवी या मोबाइल स्क्रीन ज्यादा देर तक नही देखें। रोज कम से कम 7 घंटे संतुलित नींद लें।

