बीना विधायक निर्मला सप्रे के दलबदल मामले में विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष सुनवाई, नेता प्रतिपक्ष ने पेश किए सबूत
भाेपाल, 10 फ़रवरी । मध्य प्रदेश के सागर जिले की बीना विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक रहीं निर्मला सप्रे के दलबदल मामले में मंगलवार को मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर के समक्ष अहम सुनवाई हुई। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विधानसभा अध्यक्ष के सामने अपना पक्ष मजबूती से रखते हुए दलबदल से जुड़े कथित सबूत प्रस्तुत किए।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बताया कि इस मामले को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने विधानसभा से यह स्पष्ट करने को कहा था कि अब तक क्या कार्रवाई की गई है। विधानसभा की ओर से कोर्ट को अवगत कराया गया कि प्रकरण विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष विचाराधीन है और उस पर सक्रिय रूप से कार्रवाई चल रही है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश हैं कि दलबदल से जुड़े मामलों में 90 दिनों के भीतर निर्णय लिया जाना चाहिए।
भाजपा मंच से सदस्यता ग्रहण करने के प्रमाण पेश
उमंग सिंघार ने दावा किया कि उन्होंने स्पीकर के समक्ष ऐसे पुख्ता प्रमाण रखे हैं, जिनसे यह साबित होता है कि विधायक निर्मला सप्रे ने भाजपा के मंच से सार्वजनिक रूप से सदस्यता ग्रहण की थी। इसके साथ ही उनके बयान और अन्य दस्तावेज भी सौंपे गए हैं, जो दलबदल की पुष्टि करते हैं। नेता प्रतिपक्ष ने उम्मीद जताई कि विधानसभा अध्यक्ष संवैधानिक दायित्व निभाते हुए इस मामले में निष्पक्ष और समयबद्ध निर्णय लेंगे।
हाईकोर्ट में 27 फरवरी को अगली सुनवाई
इस दलबदल प्रकरण से जुड़ी याचिकाओं पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में भी सुनवाई चल रही है। इससे पहले चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सर्राफ की डबल बेंच के समक्ष सरकार की ओर से बताया गया था कि मामला स्पीकर के पास विचाराधीन है। हाईकोर्ट ने 15 जनवरी को सरकार के इस बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए फिलहाल कोई अंतिम आदेश नहीं दिया था और स्थगन याचिका स्वीकार कर ली थी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 फरवरी को होनी है। तब तक यह देखा जाएगा कि विधानसभा अध्यक्ष इस पर कोई निर्णय लेते हैं या नहीं।
भाजपा पर टालमटोल का आरोप
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह इस मामले को जानबूझकर टाल रही है, क्योंकि उसे उपचुनाव से डर है। उन्होंने कहा कि भाजपा को आशंका है कि यदि बीना सीट पर उपचुनाव हुए तो कांग्रेस की जीत तय है, इसी वजह से निर्णय में देरी की जा रही है। सिंघार ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा कोर्ट में अपने जवाबों के जरिए कानून की व्याख्या को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है।
10–15 दिनों में फैसले की उम्मीद
विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात के बाद उमंग सिंघार ने कहा कि अध्यक्ष सभी पक्षों को सुन रहे हैं और उन्हें उम्मीद है कि आने वाले 8 से 15 दिनों के भीतर इस मामले में निर्णय आ जाएगा। कांग्रेस पार्टी ने भरोसा जताया है कि लोकतंत्र और संविधान की मर्यादा के अनुसार सच्चाई के आधार पर फैसला लिया जाएगा।
————–

