मजबूत न्याय प्रणाली के लिए मजबूत युवा वकीलों की जरूरत, इन्हें पुस्तक खरीदने के लिए दिए जाए पांच हजार रुपये
जयपुर, 14 फ़रवरी । राजस्थान उच्च न्यायालय ने प्रदेश के 28 साल तक के उन युवा वकीलों को बड़ी राहत दी है, जिनकी वकालत को अभी पांच साल की अवधि पूरी नहीं हुई है। अदालत ने प्रदेश की बार एसोसिएशनों को कहा है कि वे ऐसे युवा वकीलों के लिए राजस्थान एडवोकेट्स एड टू परचेज लॉ बुक्स स्कीम तैयार करे। इसके तहत सभी जिलों के लिए एक खरीद समिति का गठन किया जाएगा, जो जूनियर वकीलों को कानून की पुस्तकों की खरीद के लिए एकमुश्त पांच हजार रुपये की सहायता देगी। राशि लेने के एक माह के भीतर वकील को पुस्तकों का बिल पेश करना होगा। यदि वह पुस्तकें नहीं खरीद पाता है तो उसे दी गई राशि वापस ली जाएगी। वहीं यदि वह इस राशि का उपयोग दूसरे काम में करता है तो यह राशि 12 फीसदी ब्याज सहित वसूली जाएगी। इसके अलावा संबंधित प्राधिकारी को इस योजना के तहत सहायता लेने वाले वकील की ओर से बनाई लाइब्रेरी का निरीक्षण करने का भी अधिकार होगा। जस्टिस अनूप कुमार की एकलपीठ ने यह आदेश मीना शर्मा व अन्य की मोटर दुर्घटना अपील पर सुनवाई करते हुए दिए।
अदालत ने हाईकोर्ट बार एसोसिएशन को कहा है कि वह जूनियर एडवोकेट्स वेलफेयर फंड के नाम से बैंक में खाता खोले और पात्र युवा वकीलों की सूची तैयार कर उन्हें पहले आओ पहले पाओ के आधार पर इस राशि का वितरण करे। अदालत ने आदेश की कॉपी मुख्य सचिव, विधि विभाग, बीसीआई, बीसीआर और हाईकोर्ट बार एसोसिएशन को भेजते हुए मामले की सुनवाई 6 मार्च को तय कर पालना रिपोर्ट पेश करने को कहा है। वहीं अदालत ने देरी से अपील पेश करने वाले अपीलार्थियों को 11 हजार रुपए इस फंड में जमा कराने कहा है।
अदालत ने कहा कि वकील बनना एक गर्व का क्षण है, लेकिन पहली पीढ़ी के उभरते वकीलों को अपनी प्रैक्टिस स्थापित करने के लिए जरूरी संसाधन और जरूरी किताबें खरीदने का फंड नहीं होता है। उनकी यात्रा बडे सपनों से शुरू होती है, लेकिन अदालती जीवन की हकीकत आसान नहीं है। वे केस तैयार करते हैं, कानून पढते हैं और सीनियर वकीलों की सहायता करने सहित अदालतों में लंबी प्रतीक्षा करते हैं, लेकिन उनके प्रयासों को अक्सर अनदेखा किया जाता है। यदि उन्हें शुरुआत में उचित समर्थन मिले तो वे ईमानदार व कुशल पेशेवर बन सकते हैं। युवा वकीलों की मदद करना कोई उपकार नहीं, बल्कि बेहतर न्याय प्रणाली की जरूरत है।

