Uttarakhand

चंपावत सरस कॉर्बेट महोत्सव: लोकसंस्कृति, उद्यम और पर्यटन को मिला साझा मंच

चंपावत, 18 फ़रवरी । टनकपुर के केंद्रीय जल आयोग कार्यालय के पास स्थित मैदान बुधवार को सांस्कृतिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया, जब सात दिवसीय “चंपावत सरस कॉर्बेट महोत्सव–2026” का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून से वर्चुअल माध्यम से किया। उद्घाटन के साथ ही क्षेत्र में लोककला, स्थानीय उत्पाद और पर्यटन गतिविधियों का संगम देखने को मिला।

पारंपरिक स्वागत, दीप प्रज्वलन और लोक प्रस्तुतियों के साथ समारोह की शुरुआत हुई। आयोजन का मुख्य उद्देश्य चंपावत की सांस्कृतिक विरासत, लोककलाओं और पर्यटन संभावनाओं को व्यापक पहचान दिलाना है। उद्घाटन सत्र में जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति रही।

महोत्सव में उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और मध्य प्रदेश सहित 10 से अधिक राज्यों के प्रतिभागियों ने भागीदारी की। राज्य के विभिन्न जिलों से आए 37 से अधिक स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय उद्यमियों ने अपने उत्पादों के स्टॉल लगाए। पुस्तक मेले में 15 से अधिक प्रकाशकों की भागीदारी रही, जबकि बनारसी साड़ी, कश्मीरी हस्तशिल्प और पारंपरिक हस्तनिर्मित वस्तुएं आगंतुकों के आकर्षण का केंद्र बनी रहीं।

कार्यक्रम के दौरान “मुख्यमंत्री योग सखी दीदी अभियान” की शुरुआत भी की गई, जिसका उद्देश्य महिलाओं को योग से जोड़कर स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है। विद्यालयी बच्चों ने छोलिया नृत्य सहित विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया, वहीं नशा मुक्ति और टीबी उन्मूलन पर जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित हुए।

पहले दिन पतंगबाजी और रंगोली प्रतियोगिता ने उत्सव में रंग भरे। पुस्तक मेला, फोटो प्रदर्शनी, पारंपरिक वाद्य यंत्रों और चंपावत के दुर्लभ बर्तनों की प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र बनी रही।

साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चूका क्षेत्र में कैंपिंग, उचोलीगोंठ में पैरामोटरिंग, डंडाककई में पैराग्लाइडिंग तथा नंधौर वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में वाइल्डलाइफ सफारी आयोजित की गई।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि महोत्सव केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने और युवाओं के लिए अवसर सृजित करने का माध्यम है। उन्होंने काली कुमाऊँ की होली और क्षेत्रीय परंपराओं को प्रदेश की विशिष्ट पहचान बताया।महोत्सव में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों की सक्रिय भागीदारी रही, जिससे आयोजन उत्सवी वातावरण में तब्दील हो गया।