ऊर्जा विभाग में अनियमित पदोन्नति का आरोप, जांच की मांग
देहरादून, 24 फरवरी । नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने ऊर्जा विभाग में कथित अनियमित पदोन्नति और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए सरकार से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग में जुगाड़, हेराफेरी और राजनीतिक संरक्षण के माध्यम से एक तृतीय श्रेणी कर्मचारी को प्रबंध निदेशक (एमडी) के पद तक पहुंचाया गया, जो नियमों और प्रशासनिक मर्यादाओं का खुला उल्लंघन है।
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने मंगलवार को जारी बयान में यह मामला केवल एक अनियमित पदोन्नति का नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन की साख से जुड़ा गंभीर विषय है। उनके अनुसार ऊर्जा विभाग में योग्यता और अनुभव के बजाय सांठगांठ और मिलीभगत हावी है, जिससे परियोजनाएं प्रभावित हो रही हैं और वित्तीय अनुशासन कमजोर पड़ रहा है।
नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाया कि बिना उच्च अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण के कोई तृतीय श्रेणी कर्मचारी शीर्ष पद तक कैसे पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि केवल एक व्यक्ति को जिम्मेदार ठहराकर सरकार अपनी जवाबदेही से नहीं बच सकती।
आर्य ने ऊर्जा क्षेत्र की परियोजनाओं में निविदा प्रक्रियाओं की पारदर्शिता, लागत वृद्धि और वित्तीय निर्णयों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने मांग की कि संबंधित कर्मचारी की नियुक्ति से लेकर एमडी पद तक की पूरी सेवा अवधि की न्यायिक या स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही पदोन्नति प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों की भूमिका की विस्तृत पड़ताल और इस अवधि में लिए गए बड़े वित्तीय व नीतिगत निर्णयों का विशेष ऑडिट कराया जाए।
उन्होंने दोषी अधिकारियों और कथित संरक्षण देने वाले प्रभावशाली व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि यदि सरकार पारदर्शिता और सुशासन में विश्वास रखती है तो उसे समयबद्ध जांच की घोषणा करनी चाहिए, अन्यथा यह माना जाएगा कि तंत्र भ्रष्टाचार को संरक्षण दे रहा है।

