अल्पसंख्यक आयोग में रिक्त पद भरने में देरी करने पर केंद्र सरकार को लगी फटकार
नई दिल्ली, 20 मार्च । दिल्ली उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और अन्य सदस्यों के महीनों से खाली पड़े पदों को भरने से जुड़े टाइमलाइन न दाखिल करने पर केंद्र सरकार को फटकार लगाई है। चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि मामले की अगली सुनवाई जुलाई में होगी।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस बात पर संतोष जताया कि आयोग में दो पदों पर नियुक्ति की गई है। कोर्ट ने केंद्र की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) चेतन शर्मा से कहा कि हमने नियुक्तियों को लेकर टाइमलाइन पूछा था, लेकिन हलफनामे में ऐसा कुछ भी नहीं है। टाइमलाइन को लेकर अगर बेहतर हलफनामा दाखिल नहीं किया गया, तो हम अफसर को कोर्ट में बुला लेंगे। कोर्ट को हल्के में नहीं लिया जा सकता है। कोर्ट ने चेतन शर्मा से कहा कि आप संबंधित अफसर को अपने चैंबर बुलाकर बताएं। तब शर्मा ने कहा कि जो भी जरुरत होगी हम करेंगे।
कोर्ट ने 30 जनवरी काे इस बात पर चिंता जताई थी कि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग एक वैधानिक संस्था है और आयोग में अप्रैल, 2025 से चेयरपर्सन का पद खाली पड़ा हुआ है। उच्च न्यायालय ने 15 अक्टूबर, 2025 को नोटिस जारी किया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि कोई आयोग बिना प्रमुख के कैसे चल सकता है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा था कि आप सुनवाई की अगली तिथि का इंतजार नहीं करें, आप काम शुरु कराइए। यह काफी महत्वपूर्ण है।
याचिका कार्यकर्ता मुजाहिद नफीस ने दायर की है। याचिका में कहा गया है कि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग में अप्रैल महीने से कोई प्रमुख नहीं है। इसके अलावा आयोग के उपाध्यक्ष और दूसरे सदस्यों का पद भी खाली है। याचिका में कहा गया है कि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग में सर्वोच्च पद खाली रहने से आयोग का काम करीब-करीब ठप सा हो गया है। ऐसा करना संविधान में मिले अल्पसंख्यकों के अधिकारों के साथ-साथ राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग कानून का भी उल्लंघन है।
याचिका में कहा गया है कि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पिछले अध्यक्ष इकबाल सिंह लालपुरा का कार्यकाल 12 अप्रैल, 2025 को पूरा हुआ। उसके बाद से आयोग के सभी सात पद खाली पड़े हुए हैं। इस बात की सूचना केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री ने भी राज्यसभा में दी थी, लेकिन सरकार इन खाली पड़े पदों पर भर्ती नहीं कर रही है।

