आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाला : फर्जी फर्म बनाकर पैसा किया जा रहा था ट्रांसफर
चंडीगढ़, 12 मार्च । आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाले की जांच में कई बड़े खुलासे हुए हैं। मुख्य आरोपिताें द्वारा कई फर्जी कंपनियां बनाकर सरकारी धन को अवैध रूप से विभिन्न खातों में ट्रांसफर किया गया।
हरियाणा सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की एडीजीपी चारू बाली तथा एसपी गंगाराम पूनिया ने गुरुवार को पंचकूला मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत में यह जानकारी देते हुए बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सरकारी विभागों के खातों से इसे इन फर्जी कंपनियों के खातों में अनधिकृत रूप से भेजा जाता था। इन कंपनियों में आर.एस. ट्रेडर्ज, कैप को फिनटैक सर्विस, एसआरआर प्लानिंग तथा स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट शामिल हैं।
एडीजीपी ने बताया कि 23 फरवरी 2026 को एसवी एंड एसीबी थाना पंचकूला में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक तथा एयू स्माल फाइनेंस बैंक के अज्ञात कार्मिकों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 13(2) सहपठित 13(1)(ड्ड) तथा भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 316(5), 318(4), 336(3), 338, 340(2) और 61(2) के तहत मामला दर्ज किया गया था। अब तक की जांच में 8 विभागों के 12 बैंक खातों की संलिप्तता सामने आई है, जिनमें से 10 खाते आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, सेक्टर-32 चंडीगढ़ और 2 खाते एयू स्माल फाइनेंस बैंक में संचालित थे। इस मामले में 16 स्थानों पर छापेमारी की गई है। कुछ स्थानों से वीडियो फुटेज भी ली गई है।
एडीजीपी ने बताया कि अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें 6 बैंक कर्मचारी, 4 निजी व्यक्ति और एक सरकारी कर्मचारी शामिल हैं। इनमें से 10 आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं जबकि एक आरोपी पुलिस रिमांड पर है। इस दौरान संपत्तियों की खरीद से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं। साथ ही 25 से अधिक मोबाइल फोन, लैपटॉप आदि जब्त किए गए हैं, जिनकी जांच साइबर फॉरेंसिक लैब की सहायता से की जा रही है। इसके अतिरिक्त 3 फॉच्र्यूनर, 2 इनोवा और 1 मर्सिडीज सहित 6 वाहन भी जब्त किए गए हैं, जिन्हें अपराध की आय से खरीदे जाने का संदेह है। जांच एजेंसी द्वारा अब तक 100 से अधिक बैंक खातों पर डेबिट फ्रीज लगाने की कार्रवाई की गई है।
जांच में सामने आया है कि अभी तक 8 सरकारी विभागो में अनाधिकृत लेन देन सामने आया है उनकी पहचान की जा चुकी है। अभी तक की जाँच में कई सरकारी अधिकारी/ कर्मचारियों तथा निजी व्यक्तियों की संलिप्तता की भी पहचान की गई है । पुष्टि होने उपरांत विजिलेंस ब्यूरो द्वारा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही 10 संपत्तियों की पहचान की गई है, जिन्हें अपराध से अर्जित धन से खरीदे जाने का तार्किक तौर पर संदेह है।
फर्जी डेबिट मेमो और नकली बैंक स्टेटमेंट के जरिए किया गया ट्रांजैक्शन
एडीजीपी ने बताया कि बैंक रिकॉर्ड में फर्जी डेबिट मेमो तैयार कर या बिना किसी वैध डेबिट मेमो/चेक के ही धनराशि ट्रांसफर की गई। इसके अलावा फर्जी बैंक स्टेटमेंट भी तैयार किए गए ताकि खातों से धन उन विभिन्न खातों में स्थानांतरित किया जा सके जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से आरोपियों या उनके परिजनों से जुड़े हुए थे। जांच एजेंसी द्वारा बैंकों और संबंधित विभागों से बड़ी मात्रा में रिकॉर्ड प्राप्त हो चुका है और उसकी जांच की जा रही है इस मामले में विभिन्न जांच एजेंसियों द्वारा मांगी गई जानकारी भी उपलब्ध कराई जा रही है व ही विभिन्न सरकारी एजेंसियों के साथ उचित व प्रभावी सहयोग व समन्वय रखकर मामले की जांच की जा रही है।

