एसआईआर को लेकर बंगाल में ही ज्यादा दिक्कतें क्यों, जबकि अन्य राज्यों में आसानी से हो गया : सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली, 24 मार्च । उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट से मतदाताओं के नाम हटाए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का काम दूसरे राज्यों में बिना किसी खास विवाद के हो गया, जबकि दूसरे राज्यों में ज्यादा नाम कटे। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने मामले की अगली सुनवाई एक अप्रैल को करने का आदेश दिया।
सुनवाई के दौरान तृणमूल कांग्रेस की ओर से पेश वकीलों ने कहा कि बड़ी संख्या में दावों का निपटारा होना बाकी है। ऐसे में मतदाता सूची को अंतिम रुप देने की तारीख बढ़ाई जाए। वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने कहा कि राज्य में पहले चरण के चुनाव के लिए नामांकन की अंतिम तारीख 6 अप्रैल है और दूसरे चरण के लिए अंतिम तिथि 9 अप्रैल है। श्याम दीवान ने कहा कि नियम के मुताबिक नामांकन की अंतिम तारीख के बाद वोटर लिस्ट में बदलाव संभव नहीं हो पाता है। तब मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि दूसरे राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया सुचारु रुप से पूरी हुई है, जबकि पश्चिम बंगाल में ही अधिक समस्याएं सामने आ रही हैं, जबकि कई राज्यों में पश्चिम बंगाल से ज्यादा नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। तब वकील कल्याण बनर्जी ने कहा कि ऐसा निर्वाचन आयोग की सख्ती की वजह से हुआ है।
इसके पहले उच्चतम न्यायालय ने 10 मार्च को कहा था कि न्यायिक अधिकारियों पर सवाल उठाने की हिम्मत नहीं करें और वे इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया था कि वो न्यायिक अधिकारियों के काम के लिए सभी जरुरी सुविधाएं उपलब्ध कराएं। उच्चतम न्यायालय ने निर्वाचन आयोग को ये सुनिश्चित करने को कहा था कि कोई भी ऐसा कदम न उठाया जाए जो इस प्रक्रिया को बाधित करे, जब तक कि उसे उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की अनुमति न मिल जाए। कोर्ट ने कहा था कि न्यायिक अधिकारी के फैसले के खिलाफ किसी प्रशासनिक निकाय के समक्ष अपील नहीं होगी। इसकी बजाय कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश दो पूर्व उच्च न्यायालय जज या मौजूदा उच्च न्यायालय जजों की बेंच गठित कर सकते हैं जो इन अपीलों पर सुनवाई करेगी। उच्चतम न्यायालय ने निर्वाचन आयोग को निर्देश था दिया कि वे अपील की इस व्यवस्था को लेकर आधिकारिक अधिसूचना जारी करें।
याचिका में कहा गया था कि विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान याचिकाकर्ताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए। याचिकाकर्ताओं के नाम पहले के वोटर लिस्ट में नाम थे। इन्होंने पहले मतदान किया था लेकिन उनके दस्तावेज स्वीकार नहीं किए गए। तब कोर्ट ने कहा था कि मौजूदा हालात में वे न्यायिक अधिकारियों के फैसलों पर अपील नहीं कर सकती।

