Delhi

चंबल नदी में अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, राजस्थान सरकार के नोटिफिकेशन पर लगाई रोक

नई दिल्ली, 02 अप्रैल । उच्चतम न्यायालय ने चंबल नदी में अवैध खनन से वन्यजीवों को हो रहे नुकसान पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि खनन माफिया चंबल के नये डकैत हैं। उच्चतम न्यायालय ने राजस्थान सरकार के उस नोटिफिकेशन पर रोक लगा दी, जिसमें चंबल अभयारण्य की 732 हेक्टेयर भूमि को संरक्षित क्षेत्र से बाहर करने की कोशिश की गई थी।

जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि राजस्थान में खनन माफिया पुलिस, वन और प्रशासनिक अधिकारियों की हत्या कर रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि ये काफी दुखद है कि राज्य सरकार कहे कि वो प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा नहीं कर सकती है। अब इसके आगे क्या होगा। कोर्ट ने कहा कि चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन से घड़ियाल, डॉल्फिन और दुर्लभ कछुओं की प्रजाति खत्म हो रही है। जिस क्षेत्र में घड़ियाल संरक्षण प्रोजेक्ट चल रहा है, वहीं से घड़ियालों को अवैध खनन की वजह से दूसरी जगह जाना पड़ रहा है।

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने चंबल नदी में जहां घड़ियाल छोड़े थे, वहां भी अवैध रेत खनन हो रहे हैं और राज्य सरकार इस पर नियंत्रण रखने में नाकाम है। कोर्ट ने राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अवैध खनन नहीं रुका, तो वन, खनन, जल संसाधन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को इसका जिम्मेदार माना जाएगा। उच्चतम न्यायालय ने राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के अलावा केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्रालय से जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। चंबल मामले पर कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई की थी।