पाक हमले में मुजफ्फरनगर के ताऊ-भतीजी की दर्दनाक मौत, गैराज बना निशाना!
9 मई की सुबह 5 बजकर 5 मिनट पर अचानक हुए गंभीर धमाके ने मुजफ्फरनगर निवासी मोहम्मद तौहीद के परिवार की जिंदगियों को हमेशा के लिए बदल दिया। धमाके की तीव्रता इतनी थी कि तौहीद के कान सुन्न हो गए और घर का मलबा उनके ऊपर आ गिरा। जब उन्होंने होश सँभाला, तो उन्हें पता चला कि उनकी कमर से खून बह रहा है। दूसरे कमरे में जाकर देखा तो उनके बड़े भाई और बेटी का शव पड़ा था। इस कारण से उनकी दुनिया उजड़ गई है। यह घटना कश्मीर के राजौरी में हुई, जहां तौहीद अपने परिवार के साथ एक गैराज का संचालन करते हैं।तीन दिन बाद 11 मई को उन्होंने अपने प्रियजनों का अंतिम संस्कार किया, जो इस भयानक हमले का शिकार बने।
तौहीद के घर के बाहर सैकड़ों लोग एकत्रित थे, सभी उन्हें सांत्वना देने आए थे। घर के अंदर सिसकियों की आवाजें सुनाई दे रही थीं। दैनिक भास्कर की टीम ने वहाँ पहुंचकर तौहीद से बातचीत की, जिसमें उन्होंने बताया कि उन्हें भारतीय सेना के डिफेंस सिस्टम पर पूरा विश्वास था। तौहीद ने कहा कि सेना के कैंप के निकट रहने के कारण उन्होंने कभी भी किसी खतरे का आभास नहीं किया था। उन्होंने अटकल लगाई कि शायद पाकिस्तान के हमलावरों ने उनकी गैराज को आर्मी से संबंधित समझकर निशाना बनाया हो। इसके बावजूद, उन्हें यह नहीं पता था कि धमाका किस प्रकार की सामग्री से हुआ था।
मोहम्मद तौहीद के बड़े भाई मोहम्मद साहिब ने 17 साल पहले रोजगार के लिए राजौरी में जाना चुना था। साथ में उनका छोटा भाई तौहीद भी वहाँ अपनी किस्मत आजमाने आया। साहिब ने कार मिस्त्री का काम सीखकर एक गैराज खोला और अपने भाई को भी वहीं लाकर शामिल किया। परिवार के अन्य सदस्य जम्मू में रहते हैं। तौहीद ने बताया कि घर के नजदीक सेना का एक किला है, जिससे उन्हें कभी कोई खतरे का एहसास नहीं हुआ। उनका विश्वास था कि अगर उन्हें कोई खतरा होगा तो सेना उनकी रक्षा करेगी।
घटना के बाद जब तौहीद ने मदद के लिए आवाज लगाई, तब किसी ने उनकी सहायता नहीं की। प्रशासन की ओर से भी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। अंततः, उनके कर्मचारी विनोद यादव उनकी सहायता के लिए आगे आए और एंबुलेंस को बुक किया, जिससे उनकी बेटी और बड़े भाई की शव को अस्पताल ले जाया जा सका। तौहीद ने कहा कि अगर विनोद मदद नहीं करते, तो उनके प्रियजनों के शव भी घर नहीं पहुंच पाते।
इस दुखद घटना के बाद तौहीद का परिवार राज्य सरकार से नाखुश है। उन्होंने आरोप लगाया कि जम्मू-कश्मीर सरकार ने उन्हें किसी प्रकार की सहायता नहीं दी, और यूपी सरकार का भी कोई प्रतिनिधि उनके हालचाल जानने नहीं आया। हालांकि, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के बाद, 12 मई को एसडीएम और सीओ ने उनके घर का दौरा किया, लेकिन परिवार वालों में यह संशय बना हुआ है कि कहीं उनकी धार्मिक पहचान के कारण उनकी अनदेखी तो नहीं की गई। यह घटना न केवल तौहीद के लिए एक व्यक्तिगत त्रासदी है, बल्कि यह उन सभी के लिए एक स्पष्ट संदेश है जो वहाँ रह रहे हैं।

