100 हत्याओं के मास्टरमाइंड डॉ. डेथ का चौंकाने वाला नया प्लान क्या था?
डॉक्टर डेथ उर्फ देवेंद्र शर्मा, जो अपने घिनौने अपराधों के लिए जाना जाता है, राजस्थान में पिछले दो वर्षों से बाबा बनकर लोगों को धोखा दे रहा था। 20 मई को जब उसे बांदीकुई (दौसा) के एक आश्रम से गिरफ्तार किया गया, तब वह अपने भक्तों को प्रवचन दे रहा था। उसने इतना प्रभावशाली चेहरा बना लिया था कि आश्रम की कमेटी के कई अहम फैसले भी वही लेने लगा था। इस व्यक्ति ने किडनी निकालने और शवों को मगरमच्छों को खिलाने जैसे संगीन अपराध किए हैं। हालांकि, अपनी पहचान बदलकर संत दयादास महाराज के नाम से रहने लगा था और दावा करता था कि वह हर बीमारी का इलाज कर सकता है।
खुलासा होता है कि देवेंद्र शर्मा का नाम किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट से भी जुड़ा था। उसके ऊपर 100 से अधिक हत्याओं का आरोप है। मौजूदा समय में, वह सात मामलों में उम्रकैद और एक मामले में फांसी का सामना कर रहा है। अगस्त 2023 में तिहाड़ जेल से पैरोल पर बाहर आने के बाद वह कई स्थानों पर भागा और अंततः दौसा के रामेश्वरम धाम आश्रम में छिपा हुआ था।
राजस्थान पुलिस ने उसकी पत्नी शिखा का फोन सर्विलांस पर रखा था, ताकि उसकी गतिविधियों पर नज़र रखी जा सके। आश्रम में देवेंद्र की उपस्थिति का पता तब चला जब उसकी पत्नी के फोन पर कुछ अज्ञात नंबरों से कॉल आई। जब पुलिस ने इन कॉलों की जांच की, तो आश्रम में एक युवक ने दावा किया कि कॉल बाबा ने की थी। इस सूचना पर क्राइम ब्रांच की टीम ने आश्रम का दौरा किया और देखा कि एक व्यक्ति, जो देवेंद्र जैसा दिख रहा था, वहां प्रवचन दे रहा था।
देवेंद्र शर्मा ने इस काम को पुलिस के पहुँचने से पहले ही एक नए स्तर पर पहुंचा दिया था। उसने प्रवचन देने के साथ मरीजों का इलाज भी शुरू कर दिया था और जयपुर से दवा मंगवाता था। लोगों को यह विश्वास दिलाने के लिए कि वह एक संत है, उसने देवी-देवताओं की पूजा और भक्ति भाव का प्रदर्शन भी किया। स्थानीय निवासी फूलवती देवी ने बताया कि उसने कुछ ही समय में अपने चारों ओर लोगों को आकर्षित कर लिया था।
पूर्व सरपंच छोटेलाल सैनी ने बताया कि उसने गांव वालों को यह विश्वास दिलाकर खुद को मुख्य पुजारी बना लिया था कि वह मंदिर की खामियों को सुधारने में मदद करेगा।
इसकी गतिविधियों पर नजर रखने वाले ग्राम पंचायत प्रशासक कैलाश चौधरी ने बताया कि देवेंद्र ने वृद्ध आश्रम खोलने के लिए अनुमति मांगी थी, परंतु उनकी योजनाएँ समय पर रोक दी गईं।
डॉक्टर डेथ ने बांदीकुई में पहले भी जनता क्लिनिक चलाया था, जिससे वह स्थानीय लोगों से परिचित था। इस परिचितता के चलते वह वहां आसानी से छिपा रहा। उसकी यह धोखाधड़ी उसकी गिरफ्तारी से पहले तक चलती रही, तब तक जब तक पुलिस ने उसे पकड़ नहीं लिया।
डॉक्टर देवेंद्र शर्मा के इस घिनौने अपराध की कहानी यह बताती है कि कैसे एक व्यक्ति ने अपनी पहचान बदलकर समाज के सबसे निचले स्तर पर भी खुद को स्थापित किया और कई लोगों की जिंदगियों को नष्ट कर दिया। उसकी गिरफ्तारी ने न केवल न्याय का एक हिस्सा सुनिश्चित किया है, बल्कि ऐसे अन्य अपराधियों के लिए भी चेतावनी है जो समाज में अपनी पहचान छिपाकर रह रहे हैं।

