बिजली व्यवस्था के खिलाफ किसान बुधवार को करेंगे आंदोलन
किसान नेताओं ने बताया कि मानसून की बेरुखी के चलते बारानी फसलें पहले ही सूख चुकी हैं। अब मूंगफली, कपास, अरंडी, ग्वार और मूंग जैसी सिंचित फसलें भी खतरे में हैं। किसानों का कहना है कि लगातार वोल्टेज गिरने और ट्रिपिंग से सिंचाई का ब्लॉकवार शेड्यूल पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है।
कम वोल्टेज से मोटरें और ट्यूबवेल जल रहे हैं, केबलें फूंक रही हैं और खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। भारतीय किसान संघ के प्रांत मंत्री प्रगट सिंह बराड़ ने बताया कि गत 17 अगस्त को हुई संगठन की ऑनलाइन प्रांत बैठक में सभी जिलों के अध्यक्ष, मंत्री और प्रभारी शामिल हुए थे। इसमें साझा किया गया कि किसानों को फसलों के साथ-साथ सिंचाई उपकरणों का भी भारी नुकसान हो रहा है। इसी आधार पर सर्वसम्मति से आंदोलन का फैसला लिया गया।
प्रदेश महामंत्री तुलछाराम सिंवर ने बताया कि पश्चिमी राजस्थान में बिजली तंत्र का कुप्रबंधन किसानों को चौथे साल तबाह कर रहा है। बरसात नहीं होने से बारानी फसलें नष्ट हो गई हैं और अब वोल्टेज गिरने व ट्रिपिंग की वजह से सिंचित फसलें भी सूख रही हैं। मोटरें और ट्यूबवेल जल रहे हैं। किसान कर्ज और नुकसान की मार झेल रहा है। मजबूरी में आंदोलन का ऐलान करना पड़ा है। इस बार चरणबद्ध आंदोलन चलेगा और स्थायी समाधान तक संघर्ष जारी रहेगा। किसान नेताओं का कहना है कि यह संकट नया नहीं है। पिछले लगातार चार वर्षों से पश्चिमी राजस्थान बिजली आपूर्ति के कुप्रबंधन से जूझ रहा है। बरसात में बारानी फसलें नष्ट हो जाती हैं और सिंचाई के वक्त बिजली कटौती व वोल्टेज की समस्या से सिंचित फसलें भी बर्बाद हो जाती हैं। किसानों पर यह दोहरी मार हर साल आर्थिक तबाही ला रही है।

