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पिता के ख्वाब ने जन्मा डाक्टर..!

देश की राजधानी दिल्ली में एक डाक्टर ऐसी भी है। जो स्वयं के लिए नहीं अपितु अपने पिता के ख्वाब को पूरा करने के लिए सिर्फ डाक्टर बनी।बिल्कुल जी हां ये कहानी है उत्तर प्रदेश एक छोटे से शहर एटा में जन्मी डॉ. नेहा यादव की! डॉ.नेहा यादव जी का जन्म एक व्यवसायिक परिवार में हुआ था, जिस दिन उनका जन्म हुआ था उसी दिन ही उनके पिता ने तय कर लिया था कि अपनी बेटी को वो डॉक्टर बनाएंगे।डॉ नेहा शुरू से ही गणित विषय में विद्वान् थी और शुरू से ही क्लास में अव्वल आती थी! डॉ नेहा शुरू से ही IIT के द्वारा इंजीनियरिंग करना चाहती थी पर उनके पिता का ध्येय अंगद के पैर की तरह एक ही बात पर अटल था!

वहीं वजह बनी की आज देश को एक डॉक्टर मिला! साल 2005 में सीपीएमटी का एग्जाम क्लियर कर बरेली के एस आर एम एस से डॉक्टरी की पढ़ाई शुरू की बाद में उनका मन इतना लग गया कि उन्होंने तय किया वो सर्जन बनेगी पर कुछ हालात ऐसे बने की की वो एक फिजिशियन बन गई। साल 2011 में डॉ नेहा की शादी हो गई जो एक आई टी प्रोफेशनल थे और उनके जीवन में आगे बढ़ाने की एक मजबूत कड़ी बने। साल 2016तक डॉ नेहा दिल्ली में प्रेक्टिस करती रही, पर परिवार के ताने बाने में वो पूरी तरह से अपनी प्रेक्टिस को एक बड़ा रूप नहीं दे पा रही थी! तभी एक रोज़ उनकी मां उनसे कहती है कि तुमने डॉक्टरी क्या सिर्फ नाम के लिए की थी। तुम्हे कुछ बड़ा करना होगा ये प्रोत्साहन और पति की सपोर्ट से डॉ नेहा एम डी करने के लिए एक बार फिर से बापस बरेली कूच कर गई।

साल 2017 में फिर एस आर एम एस मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया। अब राह उतनी सरल नहीं थी पति एक छोटी बच्ची जिसके साथ ये सब करना एक बड़ी टास्क थी फिर भी परिवार के और पति के सहयोग से उन्होंने अपनी एम डी की डिग्री हासिल की और साथ ही साथ टोबैको और डायबिटीज में फेलोशिप की! साल 2020 में max दिल्ली में प्रेक्टिस शुरू कर दी एक तरफ करियर की दूसरी पारी शुरू हुई थी कि कोरोना ने दस्तक दी डॉ का फर्ज निभाते हुए छोटे छोटे दो बच्चों और परिवार की परवरिश देखते हुए 40, 40 घंटे की शिफ्ट की दो बार कोविड की शिकार हुई फिर भी अपनी प्रेक्टिस को नहीं छोड़ा, साथ ही साथ इसी दौर में ऑनकोलॉजी (शरीर के किसी भी अंग का कैंसर) पर भी फॉरेन से फेलोशिप की है कोविड के दौरान डाक्टर ने ऑनलाइन परामर्श 24/7 देना शुरू किया जिससे उनकी ख्याति देश के काफी कोनो में फैल गई और वही वजह बनी की उन्होंने तय किया कि वो अब अपनी प्राइवेट प्रेक्टिस भी करेगी अभी डॉ नेहा गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल में डायबटॉलजिस्ट के रूप में कार्यरत है और हजारों लोगों को इस बीमारी से सुकून दिला चुकी है साथ ही साथ वह व्यवहार कुशल भी है और एक बेहतरीन फिजिशियन भी हैं भविष्य योजना पूछने पर डॉ नेहा बताती है कि वह बरिंगम से कैंसर को जड़ से खत्म करने के लिए एक कोर्स करने का विचार बना रही है जिससे वह देश में बढ़ रहे कैंसर के मामलों में लगाम लगा सके और उनके पिता का सपना और उनकी मेहनत देश के काम आ सके।