माओवादी पार्टी के अध्यक्ष प्रचंड ने वीडियो संदेश में जेन जी के आंदोलन का किया समर्थन
संविधान दिवस की पूर्व संध्या में एक वीडियो संदेश में प्रचंड ने याद किया कि दस साल पहले घोषित संविधान हजारों शहीदों के बलिदान और लाखों नागरिकों के संघर्ष से पैदा हुई एक उपलब्धि थी। उन्होंने कहा कि 8 और 9 सितंबर के विरोध प्रदर्शनों ने यह स्पष्ट कर दिया था कि संविधान में और संशोधन आवश्यक हैं। जेन जी से पहले माओवादी पार्टी की भी यही मांग रही है, लेकिन उस समय हमारी अलग स्थिति होने के कारण इसे पूरा नहीं किया जा सका था।
प्रचंड ने दो दिवसीय विरोध प्रदर्शन के दौरान 70 से अधिक युवाओं की मौत पर दुख व्यक्त किया और सरकार की कार्रवाई को “नरसंहार” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि 9 सितंबर को सिंह दरबार, सुप्रीम कोर्ट और संसद भवन में आगजनी और तोड़फोड़ जेन जी आंदोलन का हिस्सा नहीं थी, बल्कि प्रतिगामी ताकतों की साजिश थी। राष्ट्रीय पुनर्निर्माण का आह्वान करते हुए उन्होंने सभी दलों और नागरिकों से एकजुट होने का आग्रह किया और सरकार से घटनाओं की जांच के लिए एक स्वतंत्र और निष्पक्ष आयोग बनाने की मांग की। प्रचंड ने लोकतांत्रिक ताकतों के बीच मजबूत एकता की आवश्यकता पर जोर दिया।

