Rajasthan

साढ़े पांच हजार किलोमीटर लंबा रेल मार्ग अत्याधुनिक कवच सिस्टम से होगा लैस

जोधपुर, 28 सितम्बर । सुरक्षित रेल संचालन के महत्ती उद्देश्य से भारतीय रेलवे ने उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर सहित चारों मंडलों के समूचे रेलमार्ग को टक्कररोधी कवच प्रणाली से लैस करने के लिए 23 सौ करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। जिससे जोन के साढ़े पांच हजार किलोमीटर लंबे रेलमार्ग पर कवच 4.0 प्रणाली की स्थापना की जाएगी तथा सभी रेलमार्ग टक्कररोधी बन सकेंगे।

उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शशिकिरण ने बताया कि रेलवे द्वारा सरंक्षा को सदैव प्राथमिकता दी जाती है तथा वह संरक्षित रेल संचालन के लिए प्रतिबद्व है और इसके लिए रेलवे द्वारा अत्याधुनिक तकनीक व नवाचारों का उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि संरक्षित रेल संचालन में अत्याधुनिक और अपग्रेड सिगनल प्रणाली की अहम भूमिका है जिसके तहत उत्तर पश्चिम रेलवे पर संरक्षा सुदृढ़ करने के लिए टक्कररोधी प्रणाली कवच प्रणाली का कार्य प्रगति पर है।

मुख्य जनसंपर्क अधिकारी के अनुसार उत्तर पश्चिम रेलवे के 5561 किलोमीटर रेल मार्ग में लगभग 2300 करोड़ रुपये की लागत के साथ स्वदेशी कवच प्रणाली का कार्य स्वीकृत है। और स्वदेशी टक्कररोधी प्रणाली कवच की स्थापना के लिए जोधपुर, अजमेर, जयपुर और मण्डल में शेष बचे रेल मार्ग में कवच प्रणाली स्थापित करने के लिए टेण्डर प्रक्रिया प्रगति पर है। उत्तर पश्चिम रेलवे के सभी मण्डलों में कवच प्रणाली स्थापित हो जाने के उपरांत रेलवे संरक्षा बेहतर व सुदृढ़ होगी।

यह है कवच प्रणाली की विशेषताएं

कवच एक स्वदेशी रूप से विकसित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है। इसे ट्रेन की गति की निगरानी और नियंत्रण करके दुर्घटनाओं को रोकने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसे सुरक्षा अखंडता स्तर 4 (एसआईएल 4) पर डिज़ाइन किया गया है। यह सुरक्षा डिज़ाइन का उच्चतम स्तर है।

कवच का विकास 2015 में शुरू हुआ। इस प्रणाली का तीन वर्षों से अधिक समय तक व्यापक परीक्षण किया गया। तकनीकी सुधारों के बाद, इस प्रणाली को दक्षिण मध्य रेलवे में स्थापित किया गया। पहला परिचालन प्रमाणपत्र 2018 में प्रदान किया गया। दक्षिण मध्य रेलवे में प्राप्त अनुभवों के आधार पर, एक उन्नत संस्करण ’कवच 4.0’ विकसित किया गया। इसे मई 2025 में 160 किलोमीटर प्रति घंटे तक की गति के लिए अनुमोदित किया गया। कवच के पुर्जे स्वदेश में ही निर्मित किए जा रहे हैं।