सुप्रीम कोर्ट ने विचाराधीन कैदियों के मताधिकार संबंधी याचिका पर केंद्र और चुनाव आयोग से जवाब मांगा
याचिका पंजाब के पटियाला निवासी सुनीता शर्मा ने दायर की है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 62(5) के तहत विचाराधीन कैदियों को मताधिकार से वंचित करना संवैधानिक अधिकारों और अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है।
याचिका में कहा गया है कि जब सजायाफ्ता लोग चुनाव लड़ सकते हैं और लाखों मतदाताओं का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं तो उस व्यक्ति को मताधिकार से कैसे वंचित किया जा सकता है जिसे अभी दोषी भी नहीं करार दिया गया है। याचिका में कहा गया है कि देश भर की जेलों में बंद कैदियों में से 75 फीसदी विचाराधीन कैदी हैं। इन कैदियों को स्थानीय वोटर के तौर पर जेलों के अंदर वोट डालने के लिए बूथ बनाये जाएं। अगर कैदी अपने राज्य या निर्वाचन क्षेत्र में नहीं है तो उसे पोस्टल बैलट इस्तेमाल करने की अनुमति दी जाए।

