बी–1 परीक्षा की खामियों ने खोली व्यवस्था परिवर्तन की पोल, बिना इंतजाम क्यों करवाई परीक्षा : जयराम ठाकुर
उन्होने कहा कि बिना किसी इंतजाम के इतनी बड़ी परीक्षा का आयोजन सरकार की मंशा और तैयारियों पर सवाल उठा रहा है। लोग 6 घंटे तक बैठे रहे लेकिन व्यवस्थापकों द्वारा तकनीकी खामी दूर नहीं की जा सकी। किसी जगह पर लोगों के जवाब सबमिट नहीं हो रहे थे तो कहीं पर प्रश्नों के उत्तरों में ही गलत विकल्प आ रहे थे। कहीं पर मेन सर्वर से परीक्षा केंद्र लिंक नहीं हो पाए तो कहीं पर एक ही साथ शुरू हुई परीक्षा में प्रश्नों की संख्या में, तो कहीं पर परीक्षा के समयावधि में भारी अंतर देखने को मिल रहा था। पहली पारी में परीक्षा देने आए लोगों को दूसरी पारी में भी परीक्षा देने के लिए बैठाया गया।
जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार की नाकामी की वजह से ही 4000 से ज्यादा लोगों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ा। बहुत सारे छोटे बच्चे भी जो अपने मां के साथ मजबूरन आए थे उन्हें भी घंटों इंतजार करना पड़ा। व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर व्यवस्था बैठाने वाली सरकार यदि 4 हजार लोगों के डिपार्मेंटल प्रमोशन एक्जाम नहीं करवा सकती है तो 1 लाख सरकारी नौकरियों का वादा कैसे पूरा करेगी?

