अवैध निर्माण बर्दाश्त नहीं करेंगे, हाउसिंग बोर्ड व जेडीए चार सप्ताह में पालना रिपोर्ट करें पेश- हाईकोर्ट
सुनवाई के दौरान प्रार्थी के अधिवक्ता पूनम चंद भंडारी व डॉ. टी एन शर्मा ने अदालत को बताया कि जेडीए व आवासन मंडल ने अभी तक पूर्व में दिए अदालती आदेश की पालना नहीं की है। इसलिए जेडीए व आवासन मंडल को निर्देश दिए जाएं कि वे खाली भूखंडों पर कब्जा करें। वहीं इस दौरान सांगानेर में बसी कॉलोनियों की ओर से कई विकास समितियों ने भी मामले में पक्षकार बनने का प्रार्थना पत्र लगाया। जिसमें सन्नी विकास समिति व श्री राम कॉलोनी के प्रार्थना पत्रों पर सुनवाई हुई। अदालत ने समिति के पदाधिकारियों के नाम पूछे तो विकास समिति बता नहीं पाई। वहीं कई समितियों के प्रार्थना पत्र अदालत के रिकॉर्ड पर ही नहीं आए। उनकी ओर से सीनियर एडवोकेट अजीत शर्मा ने कहा कि उनका प्रार्थना पत्र पत्रावली पर नहीं आ पाया है। जिस पर अदालत ने कहा कि इंटर्वीनर के तौर पर उनका पक्ष भी सुना जाएगा।
वहीं राज्य सरकार व आवासन मंडल की ओर से सीनियर एडवोकेट कमलाकर शर्मा ने कहा कि आवासन मंडल ने करीब 5 हजार बीघा जमीन अवाप्त की थी। इसमें कई लोग मकान बनाकर रह रहे हैं और करीब एक हजार बीघा से ज्यादा जमीन खाली है। इस पर खंडपीठ ने उन्हें कहा कि हमें सरकारी अवाप्त शुदा भूमि की चिंता है, सभी अतिक्रमण तुरंत हटाए जाने चाहिए। इस पर राज्य सरकार ने 8 सप्ताह का समय मांगा। जिस पर अदालत ने 9 दिसंबर तक का समय देते हुए कहा कि इसके बाद समय नहीं दिया जाएगा। उसी दिन पीडित पक्षकारों के प्रार्थना पत्रों पर भी बहस सुनी जाएगी। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 20 अगस्त 2025 के अंतरिम आदेश से राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह हाउसिंग बोर्ड की अवाप्तशुदा जमीन से अतिक्रमण हटाकर उन्हें ध्वस्त करे। वहीं उन अफसरों के खिलाफ कार्रवाई करे जिन्होंने अवैध निर्माण मंजूर किए थे।

