ग्रामीण महिलाओं की आजीविका और उद्यमिता पर बनबसा में विशेष संवाद, गीता धामी ने किया प्रोत्साहित
यह एक दिवसीय जेंडर संवेदीकरण कार्यशाला उन्नति महिला संकुल संघ, बनबसा द्वारा आयोजित की गई थी। इसमें 26 ग्राम संगठनों के 126 स्वयं सहायता समूहों की 1200 से अधिक महिलाएँ शामिल हुईं। ये सभी महिलाएँ ग्रामोत्थान परियोजना और एनआरएलएम के तहत विभिन्न आजीविका गतिविधियों में संलग्न हैं।
कार्यक्रम के दौरान गीता धामी ने उद्यमी महिलाओं सरिता देवी (नमकीन उत्पादन), शांति देवी (डेयरी), पूजा (ब्यूटी पार्लर) और कंचन (बैंक सखी) से बातचीत की। महिलाओं ने बताया कि समूहों से जुड़कर उन्हें आर्थिक मजबूती, आत्मविश्वास और समाज में नई पहचान मिली है।
समूहों को संबोधित करते हुए गीता धामी ने कहा कि सीएलएफ की महिलाएँ केवल सदस्य नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की अग्रदूत हैं। उन्होंने जोर दिया कि “समूह से शक्ति मिलती है और यही शक्ति समाज को नई दिशा देती है।” उन्होंने आगे कहा कि ग्रामीण महिलाएँ अब आत्मनिर्भरता की राह पर अग्रसर हैं और पारंपरिक उत्पादों को देश-विदेश तक पहुँचा रही हैं।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं की बढ़ती भूमिका और देश के महिला-प्रधान विकास की ओर बढ़ते कदमों का भी उल्लेख किया। साथ ही, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा आयोजित ‘मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव’ ने महिलाओं में नई ऊर्जा का संचार किया है।
गीता धामी ने आश्वासन दिया कि सेवा संकल्प (धारिणी) फाउंडेशन भविष्य में भी स्वास्थ्य शिविर, कौशल-विकास कार्यक्रम और नशामुक्ति अभियानों को प्रभावी ढंग से संचालित करेगा। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने महिलाओं को सम्मानस्वरूप उपहार भी प्रदान किए।
इस अवसर पर दर्जा मंत्री श्याम नारायण पांडे, भाजपा जिलाध्यक्ष गोविंद सामंत, ब्लॉक प्रमुख अंचला बोरा सहित कई अधिकारी और विभिन्न समूहों की महिलाएँ उपस्थित रहीं।

