शीतकालीन मौसम संबंधी तैयारियों को लेकर मुख्य सचिव ने की बैठक, दिए जरूरी निर्देश
इसके उपरांत अतिरिक्त मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत ने स्नो मैनुअल, कोल्ड वेव एक्शन प्लान के प्रभावी क्रियान्वयन और आईएमडी व डीजीआरई द्वारा जारी मौसम सलाहों के त्वरित प्रसार के महत्व पर प्रकाश डाला।
तत्पश्चात सभी विभागों और जिलों ने अपने-अपने क्षेत्राधिकार में की जा रही शीतकालीन तैयारी संबंधी गतिविधियों की जानकारी दी। इस दौरान चम्बा, किन्नौर, कुल्लू, लाहौल-स्पीति, शिमला और सिरमौर जिलों की तैयारी की विस्तृत समीक्षा की गई। उपायुक्तों ने आवश्यक वस्तुओं, खाद्यान्न, एलपीजी, दवाइयां, चारे-के भंडारण, ईओसी के संचालन, स्नो चेन लगे एम्बुलेंस की उपलब्धता, आईसेट वीसेट सिस्टम की जांच तथा सेना, आईटीबीपी, पुलिस, एनडीआरएफ और अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय की स्थिति से अवगत कराया।
मुख्य सचिव ने सभी विभागों और जिलों को मौसम चेतावनियों के शीघ्र प्रसार, स्नो मैनुअल व कोल्ड वेव एक्शन प्लान के प्रभावी क्रियान्वयन, नियंत्रण कक्षों की तत्परता, संसाधनों की पूर्व-स्थिति और नाजुक व उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने बर्फबारी और कड़ाके की ठंड के दौरान सड़कों, बिजली, जलापूर्ति, स्वास्थ्य सेवाओं और संचार जैसी आवश्यक सेवाओं को निर्बाध बनाए रखने पर बल दिया। उन्होंने अग्निशमन विभाग को शीतकाल में आग की घटनाओं को रोकने के लिए जागरूकता गतिविधियां और मॉक ड्रिल आयोजित करने के निर्देश भी दिए।
विभागों को फायर ऑडिट कराने, शीतकालीन यातायात योजनाएं बनाए रखने, उपकरणों की मरम्मत सुनिश्चित करने, जल पाइपों की सुरक्षा करने तथा आईसेट वीसेट वीएचएफ जैसे संचार तंत्र को सुचारू रखने के निर्देश दिए गए। जिला प्रशासन को एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, सेना, वायुसेना, आईटीबीपी, सीआईएसएफ और एसएसबी के साथ समन्वय मजबूत करने की भी सलाह दी गई।
मुख्य सचिव ने आईईसी गतिविधियों, माॅक ड्रिल्स और एचपीएसडीएमए के डिजिटल प्लेटफाॅर्म के माध्यम से क्षति की समयबद्ध रिपोर्टिंग के महत्व पर जोर दिया।

