आरएएस साक्षात्कार में दिव्यांग्ता प्रतिशत व प्रमाण-पत्रों की सूक्ष्म जांच
आयोग आरएएस भर्ती-2023 की भांति आरएएस भर्ती -2024 के साक्षात्कार में शामिल होने वाले दिव्यांग अभ्यर्थियों के दिव्यांगता प्रतिशत व प्रकार की पुष्टि के लिए पुनः मेडिकल बोर्ड के माध्यम से नई मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार सघन जांच करवा रहा है। जांच के दौरान लो-विजन और हार्ड हियरिंग के मामलों में कई प्रकार की विसंगतियां पाई गयी हैं।
आयोग सचिव ने जानकारी दी कि केन्द्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा 24 नवंबर 2025 को जारी सर्कुलर के अनुसार लाभ वितरण से पहले सक्रिय यूनिक डिसेबिलिटी आईडी कार्ड और विकलांगता प्रमाण-पत्रों का सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। यह कदम प्रमाण-पत्रों के दुरुपयोग से सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है। इसके साथ ही कार्मिक विभाग के परिपत्र दिनांक 28 अगस्त 2025 के क्रम में आयोग अपेक्षित सतर्कता बरतते हुए दिव्यांगता के प्रतिशत और इसके प्रकार की मेडिकल बोर्ड के माध्यम से जांच करवाकर पुष्टि कर रहा है। इसके तहत वे अभ्यर्थी जिनके पास यूडीआइडी प्रारंभ होने से पूर्व के प्रमाण-पत्र हैं, उनका भी पुनः सत्यापन के बाद पोर्टल के माध्यम से जारी प्रमाण-पत्र लिया जा रहा है।
यह सख्ती इसलिए बरती जा रही है क्योंकि दिव्यांगजन के लिए आरक्षण का प्रावधान उनकी वास्तविक स्थिति और चुनौतियों को देखते हुए किया जाता है। यदि कोई व्यक्ति गलत प्रमाण-पत्र प्रस्तुत कर नियुक्ति प्राप्त करता है तो यह न केवल वास्तविक दिव्यांगजन के अधिकारों का हनन है बल्कि एक आपराधिक कृत्य भी है।
आयोग ने आरएएस भर्ती परीक्षा-2023 के साक्षात्कार के दौरान संदिग्ध दिव्यांग प्रमाण-पत्रों को लेकर सख्त रुख अपनाया था और पहली बार मेडिकल जांच का प्रावधान शुरू किया था। इस सख्ती के बाद अनेक अभ्यर्थियों ने मेडिकल जांच से ही दूरी बना ली थी। कुछ प्रकरणों में अभ्यर्थियों ने आयोग को प्रार्थना-पत्र देकर अपनी श्रेणी को दिव्यांग से सामान्य या अन्य श्रेणी में बदलने की गुहार भी की थी। जांच में यह भी सामने आया कि कई अभ्यर्थी पहले से ही गलत तरीके से बनवाए गए प्रमाण-पत्रों के आधार पर सरकारी सेवाओं में कार्यरत थे, उनके विरूद्ध भी आयोग द्वारा कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों को लिखा गया है।
आयोग द्वारा ऐसे व्यक्तियों के खिलाफ जांच के लिए संबंधित विभाग तथा फर्जी प्रमाण-पत्र जारी करने वाले चिकित्सकों के विरुद्ध कार्रवाई हेतु निदेशालय चिकित्सा विभाग को भी पत्र प्रेषित किए गए हैं। वर्तमान भर्ती प्रक्रियाओ में इसी कड़ी को आगे बढ़ाया जा रहा है ताकि केवल वास्तविक रूप से पात्र अभ्यर्थियों को ही लाभ मिल सके।
आयोग द्वारा फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्र, छद्म डिग्री व दस्तावेजों तथा जालसाजी एवं अन्य प्रकरणों में अभी तक 524 संदिग्ध और अपात्र अभ्यर्थियों को आयोग की भर्ती परीक्षाओं से डिबार किया जा चुका है। इनमें से 415 अभ्यर्थियों को आजीवन आयोग की भर्ती परीक्षाओं से डिबार किया गया हैं। शेष 109 अभ्यर्थियों को एक से पांच वर्ष तक की अवधि के लिए डिबार किया गया है।

