सहकारिता हिमाचल की आत्मा : मुकेश अग्निहोत्री
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सहकारिता आंदोलन का जन्मदाता है और सहकारिता जगत को दिशा देने वाला राज्य रहा है। सहकारिता पर हर घर का विश्वास टिका है। इसकी अलख ऊना से मियां हीरा सिंह ने जगाई थी और वर्ष 1906 में ऊना में ही पहली पंजीकृत सहकारी समिति बनी।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में सहकारिता का लगभग 50 हजार करोड़ रुपये का आर्थिक साम्राज्य है, जिससे 20 लाख लोग जुड़े हुए हैं। सहकारिता एक वित्तीय संस्था होने के साथ-साथ सामूहिक स्वामित्व का उदाहरण है, जहां सभी सदस्य मालिक होते हैं। सहकारिता से निकले हिमकैप्स जैसे संस्थान नर्सिंग कॉलेज, लॉ कॉलेज चला रहे हैं, जिनसे निकले विद्यार्थी नर्स, वकील और जज बनकर समाज की सेवा कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सहकारिता आंदोलन हिमाचल प्रदेश की सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था का सशक्त आधार है और राज्य सरकार इसे आत्मनिर्भर एवं समावेशी ग्रामीण अर्थव्यवस्था का प्रमुख माध्यम बना रही है। प्रदेश में सहकारिता आंदोलन का इतिहास 125 वर्षों से अधिक पुराना है। वर्तमान में प्रदेश में 5730 सहकारी समितियां कार्यरत हैं, जिनसे लगभग 19 लाख सदस्य जुड़े हैं। पिछले तीन वर्षों में 900 नई सहकारी समितियों का पंजीकरण किया गया है तथा 20,690 पंचायतें सहकारी नेटवर्क से जुड़ चुकी हैं।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि सहकारिता के माध्यम से कृषि, दुग्ध, बैंकिंग एवं उपभोक्ता क्षेत्रों में रोजगार सृजन को बढ़ावा मिला है। प्रदेश में 2294 कृषि सहकारी समितियां और 10 सहकारी बैंक कार्यरत हैं। महिला सशक्तिकरण की दिशा में 1082 दुग्ध सहकारी समितियां सक्रिय हैं, जिनमें महिलाओं की भागीदारी प्रमुख है।

