सेवा परिलाभ और वरिष्ठता वापस लेने के आदेश पर रोक, मांगा जवाब
जयपुर, 31 दिसंबर । राजस्थान हाईकोर्ट ने एक ही भर्ती में बाद में नियुक्त प्रबोधकों को दिए सेवा परिलाभ सहित अन्य नोशनल परिलाभों को वापस लेने के राज्य सरकार के आदेश पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही अदालत ने मामले में शिक्षा सचिव, प्रारंभिक शिक्षा निदेशक और अलवर डीईओ सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने यह आदेश लक्ष्मण सिंह राजपूत व अन्य की याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए।
याचिका में अधिवक्ता रामप्रताप सैनी ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार ने प्रबोधक पद के लिए भर्ती निकाली थी। जिसमें कुछ अभ्यर्थियों को साल 2009 में नियुक्ति मिली थी। वहीं याचिकाकर्ताओं को कई सालों बाद साल 2017 में नियुक्ति दी गई। वहीं साल 2018 में उन्हें अदालती आदेश की पालना में पूर्व में लगे अन्य प्रबोधकों के समान सेवा परिलाभ व अन्य नोशनल परिलाभ दिए गए। याचिका में कहा गया कि गत 3 नवंबर को शिक्षा विभाग ने साल 2018 में दिए आदेश को वापस ले लिया और इस अवधि में दिए गए वेतन को अधिक बताकर उसकी रिकवरी निकाल दी। इसे अदालत में चुनौती देते हुए कहा गया कि एक भर्ती में अलग-अलग समय पर नियुक्त हुए अभ्यर्थियों को एक समान वेतन परिलाभ और वरिष्ठता दी जाती है। वहीं विभाग ने अदालत के आदेश की पालना में उन्हें यह परिलाभ अदा किया था। ऐसे में विभाग उन्हें वापस नहीं ले सकता। इसके अलावा विभाग की ओर से आदेश वापस लेने से पूर्व याचिकाकर्ताओं को सुनवाई का मौका भी नहीं दिया गया। ऐसे में विभाग की इस कार्रवाई को अवैध घोषित कर रद्द किया जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने परिलाभ वापस लेने के विभाग के आदेश को वापस लेते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है।

