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बेटे की चाह में छठवीं बार मां बनी महिला ने खोया नवजात

मीरजापुर, 23 जनवरी । मड़िहान कस्बा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) से जुड़ा एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है, जिसने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि स्टाफ नर्स और आशा ने गर्भवती महिला को सरकारी व्यवस्था के तहत मंडलीय अस्पताल रेफर करने के बजाय सरकारी एंबुलेंस का दुरुपयोग कर निजी अस्पताल पहुंचाया, जहां नवजात की मौत हो गई।

पटेवर गांव के मजरा कपसा झरना निवासी आरती, जो पहले से पांच पुत्रियों की मां थीं, 20 जनवरी की शाम प्रसव पीड़ा के चलते सीएचसी मड़िहान लाई गईं। परिजनों के अनुसार जांच के बाद स्टाफ नर्स ने हालत गंभीर बताकर जिला अस्पताल रेफर करने की बात कही। आरोप है कि इसके बाद स्टाफ नर्स और आशा ने महिला को मिर्जापुर मंडलीय अस्पताल ले जाने के बजाय घोरावल स्थित एक निजी अस्पताल पहुंचा दिया। रास्ते में धुरकर के पास एंबुलेंस बदलकर निजी वाहन का भी इस्तेमाल किया गया।

निजी अस्पताल में ऑपरेशन के जरिए बच्चे का जन्म कराया गया। बेटे के जन्म से जहां परिवार में खुशी का माहौल था, वहीं कुछ ही घंटों में वह मातम में बदल गया। परिजनों का आरोप है कि इलाज के नाम पर 30 हजार रुपये की मांग की गई, जिसमें 20 हजार रुपये तत्काल जमा कराए गए, जबकि शेष 10 हजार रुपये और मांगे जा रहे थे। इसी बीच नवजात की हालत बिगड़ गई और कुछ ही घंटों में उसकी मौत हो गई। प्रसूता की स्थिति भी गंभीर होने पर उसे दूसरे अस्पताल रेफर कर दिया गया।

घटना से आहत परिजनों ने पहले मड़िहान थाने में शिकायत की, लेकिन क्षेत्राधिकार का हवाला देकर उन्हें घोरावल थाने भेज दिया गया। इसके बाद घोरावल थाने में तहरीर देकर स्टाफ नर्स और आशा पर घोर लापरवाही व अवैध रूप से संचालित निजी अस्पताल में इलाज कराने का आरोप लगाया गया। पीड़ित परिवार ने स्वास्थ्य विभाग से निष्पक्ष जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और मुआवजे की मांग की है।

इस संबंध में सीएचसी प्रभारी राधेश्याम वर्मा ने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है। शिकायत मिलने पर जांच कर आवश्यक कार्रवाई की