“विकसित भारत : पंच परिवर्तन” पुस्तक का विमोचन, राष्ट्र निर्माण की वैचारिक दिशा पर हुआ विमर्श
जयपुर, 24 जनवरी । कांस्टिट्यूशनल क्लब ऑफ राजस्थान में आयोजित एक गरिमामय समारोह में “विकसित भारत : पंच परिवर्तन (एक महत्वपूर्ण पहल)” पुस्तक का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्र निर्माण, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।
पुस्तक विमोचन अवसर पर मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने पुस्तक की सराहना करते हुए कहा कि “विकसित भारत : पंच परिवर्तन” राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण वैचारिक कृति है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत की संकल्पना केवल आर्थिक समृद्धि तक सीमित नहीं हो सकती, बल्कि उसका वास्तविक अर्थ हमारी संस्कृति, सामाजिक चेतना, नागरिक मूल्यों और नैतिकता के संरक्षण में निहित है। उन्होंने पंच परिवर्तन को आत्मनिर्भरता, सशक्त पारिवारिक कुटुंब प्रबोधन, तकनीकी विकास, नागरिक कर्तव्य और भारत की विशिष्ट पहचान ‘अनेकता में एकता’ अर्थात समरसता से जोड़ते हुए इसे भारतीय संस्कृति की जड़ों को सुरक्षित रखते हुए आगे बढ़ने का प्रभावी माध्यम बताया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा हरियाणा प्रदेश प्रभारी डॉ. सतीश पूनिया ने अपने संबोधन में कहा कि पंच परिवर्तन भारत को न केवल आर्थिक रूप से सशक्त बनाएंगे, बल्कि सांस्कृतिक और मानवीय मूल्यों के स्तर पर भी उसे विश्व में नेतृत्वकारी भूमिका प्रदान करेंगे। उन्होंने इस पुस्तक को विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में एक उपयोगी वैचारिक मार्गदर्शक बताया।
विशिष्ट अतिथि अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त रानू शर्मा ने कहा कि इस प्रकार की वैचारिक रचनाएं नागरिक कर्तव्यों, सामाजिक अनुशासन और जिम्मेदार नागरिकता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
पुस्तक के संपादक डॉ. राजा भोज शर्मा ने अपने वक्तव्य में कहा कि यह पुस्तक वर्षों के आत्मचिंतन, शैक्षणिक अनुभव और सामाजिक संवाद का परिणाम है। उन्होंने बताया कि समरसता, सशक्त परिवार, स्वावलंबन, पर्यावरण चेतना और नागरिक कर्तव्य, ये पंच परिवर्तन भारत को विकसित, संस्कारित और समरस राष्ट्र बनाने की आधारशिला हैं।
कार्यक्रम में साहित्य, शिक्षा, प्रशासन और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े प्रबुद्ध नागरिकों, युवाओं एवं बुद्धिजीवियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

