सरकारी बालिका स्कूल में विदाई समारोह: अश्लील पंजाबी गानों पर छात्राएं-शिक्षिकाएं झूमीं
भीलवाड़ा, 10 फ़रवरी । जिस विद्यालय को संस्कार, अनुशासन और भविष्य निर्माण का मंदिर माना जाता है, जब वही मनोरंजन और फूहड़ता का मंच बन जाए तो शिक्षा व्यवस्था की दिशा पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ऐसा ही मामला भीलवाड़ा जिले के जहाजपुर उपखंड के शक्करगढ़ स्थित राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय से सामने आया है, जहां 12वीं कक्षा की छात्राओं के विदाई समारोह का एक वीडियो मंगलवार को सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
वायरल वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि विद्यालय परिसर में आयोजित आधिकारिक विदाई समारोह के दौरान तेज आवाज में पंजाबी गाने बजाए जा रहे हैं, जिनके बोल सार्वजनिक मंच और विशेषकर विद्यालय जैसे स्थान के लिए अशोभनीय माने जा रहे हैं। इन गानों पर न केवल छात्राएं बल्कि महिला शिक्षिकाएं भी मंच पर झूमती नजर आ रही हैं। जिस उम्र में बालिकाओं को संस्कार, संयम और जीवन मूल्यों की शिक्षा देने की आवश्यकता होती है, उसी उम्र में इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित होना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह कोई निजी आयोजन नहीं बल्कि सरकारी विद्यालय का आधिकारिक विदाई समारोह था, जहां अनुशासन और मर्यादा का पालन अनिवार्य होता है। इसके बावजूद मंच पर ऐसे गीत बजाए गए, जिनके बोल और भाव-भंगिमा स्कूल की गरिमा के विपरीत माने जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि विद्यालय में ही इस तरह का वातावरण बनाया जाएगा तो छात्राओं के चरित्र निर्माण की अपेक्षा कैसे की जा सकती है।
वायरल वीडियो सामने आने के बाद अभिभावकों और सामाजिक संगठनों में रोष व्याप्त है। उनका आरोप है कि जिन शिक्षकों पर समाज को सही दिशा देने और बालिकाओं के नैतिक विकास की जिम्मेदारी होती है, वही यदि इस तरह के कार्यक्रमों में भाग लेते नजर आएं तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। अभिभावकों का कहना है कि विद्यालय केवल किताबी शिक्षा का स्थान नहीं, बल्कि संस्कार और अनुशासन सिखाने का केंद्र होता है।
मामला उजागर होते ही शिक्षा विभाग भी हरकत में आया है। इस संबंध में मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (सीबीईओ) जहाजपुर शिखा राणा ने बताया कि विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में अशोभनीय और फूहड़ गानों के उपयोग को गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने कहा कि संबंधित शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है और पूरे मामले की जांच की जा रही है।
सीबीईओ ने यह भी स्पष्ट किया कि विद्यालय परिसरों में मर्यादित और अनुशासित वातावरण बनाए रखना शिक्षकों की जिम्मेदारी है। यदि जांच में दोष सिद्ध होता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए विद्यालयों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।

