हाई कोर्ट में विदेश मंत्रालय ने कहा- मेजर विक्रांत अपनी बहन सेलिना जेटली से बात नहीं करना चाहते
नई दिल्ली, 12 फ़रवरी । विदेश मंत्रालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि संयुक्त अरब अमीरात में कैद में रखे गए सेवानिवृत मेजर विक्रांत कुमार जेटली अपनी बहन सेलिना जेटली से बात नहीं करना चाहते हैं। इसके बाद जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव की बेंच ने विदेश मंत्रालय को सेलिना जेटली की ओर से दायर याचिका की प्रति विक्रांत कुमार जेटली को सौंपने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 17 फरवरी को होगी।
सुनवाई के दौरान विदेश मंत्रालय की ओर से बताया गया कि मेजर विक्रांत कुमार जेटली अपनी बहन से बात नहीं करना चाहते हैं। इस दौरान विक्रांत कुमार जेटली की पत्नी चारुल जेटली ने कोर्ट से कहा कि वे अपने पति से जेल में मिली थीं और वो अपनी बहन की ओर से बताये गए लॉ फर्म से काम नहीं करवाना चाहते हैं। चारुल जेटली ने कहा कि उनके पति सरकार की ओर से नियुक्त लॉ फर्म से काम करवाना चाहते हैं।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि विक्रांत कुमार जेटली से 13 फरवरी को राजनयिक मुलाकात होनी है। तब कोर्ट ने कहा कि सेलिना जेटली की ओर से दायर याचिका विक्रांत जेटली को सौंपी जाए। अगर विक्रांत जेटली सरकार की ओर से नियुक्त लॉ फर्म से काम करवाना चाहते हैं तो जरुरी प्रक्रियाएं पूरी की जाएं। अगर वे ऐसा नहीं चाहते तो उन्हें दूसरे कानूनी विकल्प तलाशने होंगे। कानूनी मदद विक्रांत कुमार जेटली के ऊपर निर्भर करेगा।
दरअसल, सेलिना जेटली ने याचिका दायर कर कहा है कि उनके सेना से रिटायर्ड भाई मेजर विक्रांत कुमार जेटली का संयुक्त अरब अमीरात में अपहरण कर लिया गया और वो करीब एक साल से कैद में हैं। याचिका में मांग की गई है कि मेजर विक्रांत कुमार जेटली को विदेश मंत्रालय की ओर से कानूनी सहायता, चिकित्सा सुविधा और राजनयिक सहायता उपलब्ध करायी जाए।
याचिका में कहा गया है कि मेजर विक्रांत ने भारतीय सेना और लेबनान में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन को अपनी सेवाएं दी हैं। वे संयुक्त अरब अमीरात में एक कंसल्टेंसी फर्म को अपनी सेवाएं दे रहे थे। वहां उनका एक मॉल से तब अपहरण कर लिया गया जब उनकी पत्नी उनके साथ थीं। उनके अपहरण की सूचना मिलने के बाद सेलिना जेटली ने केंद्र सरकार के मदद पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज करायी। शिकायत दर्ज कराने के बावजूद उन्हें अपने भाई के बारे में कोई अपडेट नहीं मिली। सेलिना जेटली ने संयुक्त अरब अमीरात स्थित भारतीय दूतावास से भी संपर्क किया था, लेकिन कोई लाभ नहीं मिला। उसके बाद उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।

