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₹32,000 करोड़ के मिशन के साथ भारत करेगा वैश्विक क्रिटिकल मिनरल्स यात्रा का नेतृत्ववर्ष के अंत तक स्थायी चुंबकों का उत्पादन शुरू होगा:


नई दिल्ली। श्री जी. किशन रेड्डी, केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री, भारत सरकार ने आज क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में संसाधन निर्भरता से मूल्य संवर्धन की दिशा में निर्णायक बदलाव का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत अपने रणनीतिक और आर्थिक भविष्य को सुरक्षित करने के लिए वैश्विक क्रिटिकल मिनरल्स परिदृश्य में एक आकर्षक और विश्वसनीय गंतव्य के रूप में स्वयं को स्थापित कर रहा है।
फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) द्वारा भारत सरकार के खान मंत्रालय के साथ संयुक्त रूप से आयोजित ‘इंडियन क्रिटिकल मिनरल्स लैंडस्केप: फाउंडेशन फॉर ए सस्टेनेबल फ्यूचर – एम्पावरिंग इनोवेशन, ग्रोथ एंड सेल्फ-रिलायंस’ के दूसरे संस्करण को संबोधित करते हुए श्री रेड्डी ने कहा कि भारत वर्तमान में क्रिटिकल मिनरल्स के लिए 95 प्रतिशत आयात पर निर्भर है। उन्होंने अन्वेषण, खनन, प्रसंस्करण, पुनर्चक्रण और उन्नत विनिर्माण तक एक सुदृढ़ एवं आत्मनिर्भर पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि सरकार क्रिटिकल मिनरल्स क्षेत्र में आयात निर्भरता कम करने और घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए “रिफॉर्म एक्सप्रेस” मोड में कार्य कर रही है। “केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और सभी हितधारकों के साथ मिलकर इस क्षेत्र में सुधारों को तेज गति से आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है,” उन्होंने जोर देते हुए कहा।
मंत्री ने बताया कि अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास को सुदृढ़ करने के लिए 9 उत्कृष्टता केंद्र (सीओई) चिन्हित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि ₹32,000 करोड़ के परिव्यय के साथ राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल्स मिशन के अंतर्गत कार्य प्रारंभ हो चुका है। “देशभर में 4,000 से अधिक क्रिटिकल मिनरल्स अन्वेषण गतिविधियां शुरू की जा चुकी हैं। हम अन्वेषण से लेकर उन्नत प्रसंस्करण तक संपूर्ण वैल्यू चेन को सुदृढ़ कर रहे हैं, ताकि भारत अपने संसाधन सामर्थ्य को रणनीतिक लाभ में परिवर्तित कर सके,” उन्होंने कहा।
सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए मंत्री ने उद्योग जगत से उन्नत प्रौद्योगिकियों, अर्बन माइनिंग, पुनर्चक्रण और वैश्विक परिसंपत्तियों के अधिग्रहण में निवेश करने का आह्वान किया, ताकि भारत वैश्विक क्रिटिकल मिनरल्स पारिस्थितिकी तंत्र में एक विश्वसनीय और आत्मनिर्भर नेतृत्वकर्ता के रूप में उभरे। उन्होंने बताया कि सरकार क्रिटिकल मिनरल्स के कच्चे माल के आयात पर सीमा शुल्क में छूट दे रही है और इसके लिए एक अलग कोष भी बनाया गया है। साथ ही, राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण न्यास को भी सुदृढ़ समर्थन दिया जा रहा है।
मंत्री ने यह भी घोषणा की कि ₹7,280 करोड़ की पीएलआई योजना के तहत वर्ष के अंत तक स्थायी चुंबकों (परमानेंट मैग्नेट्स) का उत्पादन प्रारंभ हो जाएगा। घरेलू मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने और आयात निर्भरता कम करने के लिए आंध्र प्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र और गुजरात—इन चार राज्यों में क्रिटिकल मिनरल्स प्रोसेसिंग यूनिट्स स्थापित की जाएंगी। इसके अतिरिक्त, 143 कोयला खदानों को ‘माइन क्लोजर एक्टिविटीज’ के तहत चिन्हित किया गया है, जिन्हें 2028 तक सतत परिवर्तन और संसाधन अनुकूलन पर ध्यान केंद्रित करते हुए पूर्ण किया जाएगा।
भारत में कनाडा के उच्चायोग के मंत्री (वाणिज्य) श्री एड जैगर ने वैश्विक सहयोग और सुदृढ़ सप्लाई चेन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि क्रिटिकल मिनरल्स अब वैश्विक अर्थव्यवस्था को आकार देने वाली रणनीतिक परिसंपत्तियां बन चुकी हैं। कनाडा, अन्वेषण, प्रसंस्करण और सुदृढ़ सप्लाई चेन में सहयोग को गहरा करते हुए भारत का एक स्थिर और जिम्मेदार साझेदार बनने का इच्छुक है।
हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के मुख्य परिचालन अधिकारी एवं फिक्की टास्कफोर्स ऑन क्रिटिकल मिनरल्स के वरिष्ठ सदस्य श्री किशोर एस ने कहा कि क्रिटिकल मिनरल्स भारत की राष्ट्रीय रणनीति के केंद्र में आ चुके हैं। राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल्स मिशन और पारदर्शी नीलामी तंत्र के तहत हुए सुधार भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का स्पष्ट संकेत देते हैं। उद्योग सरकार के साथ मिलकर एक एकीकृत और वैश्विक प्रतिस्पर्धी पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए तैयार है।
फिक्की की महानिदेशक सुश्री ज्योति विज ने कहा कि विकसित भारत के विजन की दिशा में आगे बढ़ते हुए, विनिर्माण और डाउनस्ट्रीम उद्योगों की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए प्राकृतिक संसाधनों, विशेषकर क्रिटिकल मिनरल्स की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है, जो आत्मनिर्भर भारत के सिद्धांत के अनुरूप है।”
जेएसडब्ल्यू समूह के कार्यकारी उपाध्यक्ष एवं फिक्की माइनिंग कमेटी के सह-अध्यक्ष श्री पंकज सतीजा ने कहा, “यह केवल नीति का क्षण नहीं, बल्कि मिशन का क्षण है। उद्योग को सरकार के साथ ‘संकल्प मोड’ में कार्य करते हुए अन्वेषण, प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण में घरेलू वैल्यू चेन का निर्माण करना होगा, ताकि भारत की दीर्घकालिक खनिज सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।”
सम्मेलन के दौरान मंत्री ने वैश्विक क्रिटिकल मिनरल्स परिसंपत्तियों पर फिक्की पोर्टल का अनावरण किया, जो वैश्विक खनिज ब्लॉकों, अन्वेषण स्थिति, स्वामित्व और संसाधन अनुमान संबंधी डेटा प्रदान करने वाला एक व्यापक ज्ञान मंच है।
कार्यक्रम के दौरान क्रिटिकल मिनरल्स पर फिक्की-डेलॉयट रिपोर्ट भी जारी की गई, जिसमें भारत के क्रिटिकल मिनरल्स पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने के लिए नीतिगत सुझाव और रणनीतिक मार्ग प्रस्तुत किए गए।
सम्मेलन में उद्योग जगत के नेताओं, वैश्विक साझेदारों और नीति निर्माताओं की सक्रिय भागीदारी रही, जिन्होंने घरेलू अन्वेषण को गति देने, प्रसंस्करण क्षमताओं को सुदृढ़ करने, एआई सहित उन्नत प्रौद्योगिकियों के उपयोग, नवोन्मेषी वित्तपोषण मॉडल विकसित करने और सुदृढ़ अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के माध्यम से क्रिटिकल मिनरल्स सप्लाई चेन को सुरक्षित करने पर विचार-विमर्श किया।