पीएम आवास के पास की तीन झुग्गी बस्तियों को खाली नहीं करने वालों को फिलहाल राहत
नई दिल्ली, 19 मई । दिल्ली उच्च न्यायालय ने प्रधानमंत्री आवास के नजदीक बसी तीन झुग्गी बस्तियों को अभी तक खाली नहीं कर सकने वालों को फौरी राहत दी है। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि फिलहाल उनके खिलाफ कोई भी निरोधात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 26 मई को होगी।
दरअसल, 12 मई को उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने इन तीनों झुग्गी बस्तियों को हटाने की अनुमति दी थी। जस्टिस पुरुषेंद्र कौरव की पीठ इन झुग्गियों में रहने वालों को निर्देश दिया था कि वे दो हफ्ते में जगह खाली कर दें। एकल पीठ ने कहा था कि प्रधानमंत्री आवास के पास की ये झुग्गियां अनधिकृत हैं। इसी आदेश को डिवीजन बेंच में चुनौती दी गई है।
एकल पीठ ने इन झुग्गियों में रहने वालों को बुनियादी सुविधाओं के साथ सावदा घेवरा में पुनर्वासित करने का आदेश दिया था। पीठ ने प्रशासन को ये सुनिश्चित करने को कहा था कि पुनर्वास के दौरान झुग्गियों में रहने वाले लोगों को न्यूनतम बाधा होनी चाहिए। केंद्र सरकार का राष्ट्रीय सुरक्षा की चिंता एक वैध वजह है जिसकी वजह से इन झुग्गियों को खाली कराया जाएगा।
इस मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा था कि ये झुग्गियां सैन्य संस्थानों के बिल्कुल नजदीक हैं जो काफी संवेदनशील इलाका है। केंद्र सरकार ने वैश्विक सुरक्षा परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा था कि ऐसे स्थानों पर अनधिकृत ढांचे खड़े नहीं किए जा सकते हैं और ये राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ मसला है। प्रधानमंत्री आवास से करीब 45 किलोमीटर दूर सावदा घेवरा में बने पुनर्वास कॉलोनियों में सात सौ से ज्यादा प्रभावितों को बसाया जा रहा है। इनमें से 192 ने दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड की ओर से जारी आवंटन पत्र स्वीकार कर लिया है। 136 ने तो फ्लैट का कब्जा भी ले लिया है।
उच्च न्यायालय में तीन झुग्गियों भाई राम कैंप, मस्जिद कैंप और डीआईडी कैंप के निवासियों ने याचिका दायर की थी। ये झुग्गियां दिल्ली रेस क्लब और जयपुर पोलो ग्राउंड के नजदीक हैं। केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने इन झुग्गियों के निवासियों को हटाने के लिए अक्टूबर 2025 और फरवरी 2026 में नोटिस जारी किया था। इसी नोटिस को उच्च न्यायालय की एक पीठ में चुनौती दी गई थी।

