128 करोड़ के फर्जी जीएसटी रैकेट में दो और गिरफ्तारी, फर्जी फर्म बनाकर तैयार किए जाते थे फर्जी बिल
नई दिल्ली, 23 मई । दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने 128 करोड़ रुपये के फर्जी जीएसटी इनवॉइसिंग रैकेट के मामले में दो और आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही इस मामले में अब तक कुल आठ आरोपितों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस के अनुसार आरोपित फर्जी कंपनियां बनाकर और लोगों के पहचान संबंधी दस्तावेजों का दुरुपयोग कर कथित तौर पर नकली जीएसटी बिल तैयार करते थे। मामले में अब पूरे नेटवर्क और उससे जुड़े अन्य लाभार्थियों की तलाश की जा रही है।
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ईओडब्ल्यू के अधिकारियों के अनुसार इस मामले में 24 मार्च 2026 को आर्थिक अपराध शाखा थाने में एफआईआर संख्या 66/2026 दर्ज की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि एक व्यक्ति के पहचान पत्र और वित्तीय दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर एम/एस आर.के. एंटरप्राइजेज नाम से फर्जी प्रोपराइटरशिप फर्म तैयार की गई। शिकायतकर्ता को जीएसटी विभाग में नौकरी दिलाने का झांसा दिया गया था। जांच के शुरुआती चरण में पुलिस ने छह आरोपितों राज कुमार दीक्षित, अमर कुमार, विभाष कुमार मित्रा, नितिन वर्मा, मोहम्मद वसीम और आबिद को गिरफ्तार किया था। पूछताछ के लिए सभी को पुलिस रिमांड पर लिया गया। जांच आगे बढ़ी तो कई अहम खुलासे हुए। पुलिस जांच में सामने आया कि शिकायतकर्ता का परिचित पुनीत किसी तरह उसके पहचान संबंधी दस्तावेज हासिल करने में सफल हो गया। आरोप है कि उसने ये दस्तावेज मध्य प्रदेश के भोपाल निवासी हेमंत मुलानी को भेज दिए। पुलिस के अनुसार हेमंत मुलानी ने उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर दिल्ली में आर.के. एंटरप्राइजेज नाम से जीएसटी पंजीकरण कराया। इसके बदले कथित तौर पर पुनीत को पांच हजार रुपये दिए गए।
जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी फर्म से जुड़े डिजिटल क्रेडेंशियल गिरफ्तार आरोपित नितिन वर्मा को 50 हजार रुपये लेकर दिए गए थे। पुलिस का दावा है कि इसके जरिए फर्जी जीएसटी बिल और फर्जी रिटर्न दाखिल किए जाते थे। नए तथ्य सामने आने के बाद ईओडब्ल्यू की टीम ने दिल्ली-एनसीआर के कई स्थानों पर दबिश दी। एसआई नवीन के नेतृत्व में गठित टीम ने लगातार कार्रवाई करते हुए 19 मई को हेमंत मुलानी और 21 मई को पुनीत को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक 25 वर्षीय पुनीत यमुना विहार का रहने वाला है और टीवी सर्विस मैकेनिक का काम करता है। आरोप है कि काम के दौरान उसके पास कई लोगों के पहचान संबंधी दस्तावेजों की डिजिटल कॉपी पहुंच जाती थी, जिन्हें वह पैसों के बदले आगे उपलब्ध कराता था। वहीं भोपाल निवासी 24 वर्षीय हेमंत मुलानी कॉमर्स ग्रेजुएट है और अकाउंटेंट का काम करता था। पुलिस का दावा है कि उसने जीएसटी रिफंड सिस्टम की खामियों को समझने के बाद कथित तौर पर फर्जी फर्म तैयार करने और उनकी डिजिटल जानकारी बेचने का काम शुरू किया। ईओडब्ल्यू ने गिरफ्तार आरोपितों के कब्जे से तीन मोबाइल फोन और एक लैपटॉप बरामद किया है। पुलिस का कहना है कि इनमें महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मिले हैं।

