शुरू होगा ‘वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान’, जल बचाने को जन आंदोलन बनाने की तैयारी
जयपुर, 23 मई । प्रदेश में जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने के उद्देश्य से ‘वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान-2026’ का राज्यव्यापी शुभारंभ 25 मई को गंगा दशमी के अवसर पर किया जाएगा। यह अभियान पांच जून विश्व पर्यावरण दिवस तक चलेगा। अभियान के तहत जल संग्रहण, भू-जल पुनर्भरण, स्वच्छता, पौधारोपण और पर्यावरण संरक्षण को लेकर व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
अभियान की तैयारियों को लेकर शनिवार को शासन सचिवालय में ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक आयोजित हुई। बैठक में विद्यालय शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर, जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री संजय शर्मा तथा पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री ओटा राम देवासी सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के मार्गदर्शन में यह अभियान केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं रहेगा, बल्कि जन आंदोलन का रूप लेगा।
उन्होंने कहा कि जल संरक्षण और स्वच्छता के लिए समाज के हर वर्ग को साथ जोड़ना आवश्यक है। अभियान में सांसदों, विधायकों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, उद्योगपतियों, भामाशाहों, धार्मिक संस्थाओं और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों को देखते हुए जल संरक्षण अब आवश्यकता ही नहीं, बल्कि भविष्य की सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है।
उन्होंने हरियालो राजस्थान अभियान के तहत बड़े स्तर पर पौधारोपण करने के निर्देश देते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए जनसहभागिता जरूरी है। उन्होंने राजीविका समूहों से जुड़ी महिलाओं को भी अभियान से जोड़ने पर विशेष जोर दिया।
डॉ. मीणा ने कहा कि गांव-गांव में कलश यात्राएं, प्रभात फेरियां, पीपल पूजन और जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि लोगों में जल संरक्षण के प्रति भावनात्मक जुड़ाव बढ़ सके। उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान किसानों को ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट (ग्राम) की गतिविधियों की जानकारी भी दी जाएगी। किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, जल प्रबंधन, फसल विविधीकरण और कृषि नवाचारों से अवगत कराया जाएगा।
उन्होंने बताया कि गत वर्ष आयोजित अभियान में 1.32 करोड़ महिलाओं सहित 2.53 करोड़ नागरिकों ने भागीदारी निभाई थी। इस बार इससे भी अधिक लोगों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण से भू-जल स्तर में सुधार होता है, वनस्पतियां विकसित होती हैं और पर्यावरण संतुलन बना रहता है।
शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि आमजन को जल संरक्षण के फायदे समझाने होंगे, तभी अभियान स्थायी सफलता प्राप्त करेगा। वहीं जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने युवाओं और विद्यार्थियों को अधिकाधिक जोड़ने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि मानसून से पहले पारंपरिक जल स्रोतों की सफाई कर उन्हें पुनर्जीवित किया जाए और वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने घरों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाने वालों को सम्मानित करने का सुझाव भी दिया।
वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री संजय शर्मा ने बताया कि प्रदेश में वर्ष 2024 में 7 करोड़ से अधिक और वर्ष 2025 में 11.55 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए हैं। राज्य सरकार ने आगामी पांच वर्षों में 50 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष कई जिलों में चंदन के पौधों का रोपण भी किया जाएगा।
बैठक में जल संचय-जल भागीदारी अभियान की प्रगति की समीक्षा भी की गई। जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अभय कुमार ने बताया कि राज्य में जल भंडारण क्षमता बढ़ाने और भू-जल पुनर्भरण के लिए 2 लाख 67 हजार 837 कार्य स्वीकृत किए गए थे, जिनमें से 2 लाख 33 हजार 854 कार्य पूर्ण हो चुके हैं, जबकि 33 हजार 983 कार्य प्रगति पर हैं।
वहीं भू-जल विभाग के प्रमुख शासन सचिव हेमंत कुमार गेरा ने कर्मभूमि से मातृभूमि अभियान की जानकारी देते हुए बताया कि वर्षा जल संचयन और भू-जल पुनर्भरण के लिए जनभागीदारी से बड़े स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। वर्ष 2025-26 में 5 हजार संरचनाओं के लक्ष्य के मुकाबले 17 हजार 93 जल संरक्षण संरचनाएं बनाई गईं, जबकि वर्ष 2026-27 में अब तक 2 हजार 64 संरचनाओं का निर्माण हो चुका है।
बैठक में यह भी बताया गया कि पिछले वर्ष आयोजित वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान के दौरान एक लाख 2100 से अधिक स्थानों पर श्रमदान हुआ, 42 हजार से अधिक जल स्रोतों की सफाई की गई, 9 हजार 800 कलश यात्राएं निकाली गईं तथा 13 हजार 600 ग्राम सभाएं आयोजित की गईं। इसके अलावा हरियालो राजस्थान अभियान के तहत 3 करोड़ 42 लाख से अधिक गड्ढे पौधारोपण के लिए तैयार किए गए।
राज्य सरकार का मानना है कि जनभागीदारी के बिना जल संरक्षण संभव नहीं है। ऐसे में ‘वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान-2026’ केवल पर्यावरण सुरक्षा का कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल और हरियाली बचाने का व्यापक सामाजिक आंदोलन बनने जा रहा है।

