Himachal Pradesh

शिमला के ऐतिहासिक वाइल्डफ्लावर हॉल को 35 साल की लीज पर देगा सुक्खू सरकार, दुनिया की बड़ी होटल कंपनियों को न्योता

शिमला, 25 जून । राजधानी शिमला के पास देवदार के घने जंगलों के बीच 8,250 फीट की ऊंचाई पर स्थित ऐतिहासिक वाइल्डफ्लावर हॉल को लेकर राज्य की सुक्खू सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। लंबे कानूनी संघर्ष के बाद इस प्रतिष्ठित संपत्ति का मालिकाना हक हासिल करने वाली हिमाचल प्रदेश सरकार अब इसे 35 साल की लीज पर देने की तैयारी में है। इसके लिए वैश्विक स्तर पर निविदाएं आमंत्रित की गई हैं। खास बात ये है कि इसमें दुनिया की प्रमुख होटल कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा देखने को मिलेगी।

राज्य के पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन विभाग ने छराबड़ा स्थित इस लक्जरी हेरिटेज संपत्ति को ऑपरेशन, मैनेजमेंट और मेंटेनेंस (ओएमएम) आधार पर लीज पर देने के लिए टेंडर जारी किए हैं। प्रस्तावित लीज अवधि 35 वर्ष की होगी। इसमें शुरुआती 30 वर्ष और उसके बाद पांच वर्ष का विस्तार शामिल है।

टेंडर की शर्तों के अनुसार इच्छुक कंपनियों को 24 करोड़ रुपये की बिड सिक्योरिटी जमा करनी होगी। टेंडर दस्तावेज की कीमत 5 लाख रुपये निर्धारित की गई है। 24 जून से एक महीने की साइट निरीक्षण अवधि शुरू हो चुकी है। एक जुलाई को प्री-बिड कॉन्फ्रेंस आयोजित होगी, जबकि तकनीकी बोलियां 24 जुलाई को खोली जाएंगी। सफल बोलीदाता के नाम की घोषणा 22 अगस्त को किए जाने की संभावना है।

सरकार को पूरी उम्मीद है कि देश के सबसे प्रतिष्ठित पर्वतीय लक्जरी रिसॉर्ट्स में शामिल वाइल्डफ्लावर हॉल से बड़ा राजस्व अर्जित होगा और इसकी ऐतिहासिक पहचान और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा भी बरकरार रहेगी।

85 कमरों वाले इस पांच सितारा लक्जरी रिसॉर्ट में स्पा, स्विमिंग पूल, जिम, बैंक्वेट हॉल सहित कई आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं। करीब 77,471 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैली इस संपत्ति में 2,200 से अधिक पेड़ हैं, जिनमें अधिकांश परिपक्व देवदार के हैं।

वाइल्डफ्लावर हॉल का 123 साल पुराना गौरवशाली इतिहास

वाइल्डफ्लावर हॉल का इतिहास 1902 से जुड़ा है। उस समय भारत में ब्रिटिश सेना के कमांडर-इन-चीफ लॉर्ड किचनर ने इसका निर्माण कराया था। 1909 में उनके इंग्लैंड लौटने के बाद यह संपत्ति एक ब्रिटिश दंपती के पास चली गई और बाद में औपनिवेशिक दौर में होटल के रूप में संचालित होने लगी।

स्वतंत्रता के बाद यह संपत्ति केंद्र सरकार के अधीन रही और वर्ष 1973 में इसे हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम (एचपीटीडीसी) को हस्तांतरित कर दिया गया। हालांकि 1993 में भीषण आग लगने से मूल ऐतिहासिक भवन पूरी तरह नष्ट हो गया था।

आग की घटना के बाद हिमाचल सरकार ने होटल के पुनर्निर्माण और संचालन के लिए ईस्ट इंडिया होटल्स लिमिटेड (ईआईएचएल) ओबेरॉय समूह की मूल कंपनी के साथ साझेदारी की थी। लेकिन तत्कालीन भाजपा सरकार ने 6 मार्च 2002 को इस समझौते को समाप्त कर दिया।

यहीं से शुरू हुई कानूनी लड़ाई हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची और दो दशक से अधिक समय तक चली।

फरवरी 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश सरकार के पक्ष में फैसला सुनाते हुए वाइल्डफ्लावर हॉल का स्वामित्व और नियंत्रण राज्य सरकार को सौंपने का आदेश दिया। इसके बाद 31 मार्च 2025 को सरकार ने संपत्ति का पूर्ण नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया।

लीज प्रक्रिया पूरी होने तक ओबेरॉय समूह को अस्थायी व्यवस्था के तहत होटल संचालन जारी रखने की अनुमति दी गई है। इस दौरान पर्यटन निदेशक को संपत्ति का प्रशासक नियुक्त किया गया है।