चेकडैम, पौधारोपण और माइक्रो प्लानिंग से सहेजी जाएगी नयार नदी की जीवनरेखा
पौड़ी गढ़वाल, 29 जून । प्रमुख सचिव व जनपद के प्रभारी सचिव दिलीप जावलकर ने सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जल स्रोत एवं नदी पुनर्जीवन प्राधिकरण (सारा) की बैठक में नयार नदी पुनर्जीवन के लिए तैयार विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि डीपीआर एक सप्ताह के भीतर शासन को प्रेषित की जाए, ताकि परियोजना पर शीघ्र कार्रवाई शुरू की जा सके। बैठक में जलागम विभाग के उप निदेशक ने पावर प्वाइंट प्रस्तुतीकरण के माध्यम से परियोजना का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया।
प्रभारी सचिव ने कहा कि नयार घाटी जनपद की पेयजल, सिंचाई एवं ग्रामीण आजीविका का प्रमुख आधार रही है। ऐसे में नदी और उससे जुड़े जल स्रोतों का संरक्षण पर्यावरणीय आवश्यकता के साथ-साथ सामाजिक एवं आर्थिक विकास की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि नदी पुनर्जीवन योजना के माध्यम से सूखते जल स्रोतों को पुनर्जीवित कर क्षेत्र की दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। बताया कि परियोजना के तहत जलागम आधारित उपचार, कंटूर ट्रेंच, तालाब एवं चेकडैम निर्माण, माइक्रोप्लानिंग, जियोटैगिंग तथा डिजिटल मॉनिटरिंग जैसे वैज्ञानिक उपाय अपनाए जाएंगे। इन प्रयासों से वर्षाजल का बेहतर संरक्षण होगा, भूजल स्तर में सुधार आएगा, मृदा अपरदन पर नियंत्रण मिलेगा व नदी तंत्र का पारिस्थितिक संतुलन सुदृढ़ होगा।
प्रमुख सचिव ने निर्देश दिए कि सभी जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण जियोटैग लोकेशन के आधार पर किया जाए, जिससे कार्यों की गुणवत्ता, पारदर्शिता और प्रभावशीलता सुनिश्चित हो सके। उन्होंने वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप नियमित मॉनिटरिंग, जल स्तर के आकलन तथा चरणबद्ध माइक्रोप्लान तैयार करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी को पूर्वी एवं पश्चिमी नयार क्षेत्र में प्रस्तावित कार्यों का समेकित एवं अद्यतन डाटा तैयार कराने तथा विभिन्न विभागों द्वारा किए गए सर्वेक्षणों की जानकारी संकलित करने के निर्देश दिए। साथ ही चेकडैमों की गुणवत्ता में सुधार, नियमित निरीक्षण तथा उनके आसपास व्यापक पौधारोपण सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने जल संरक्षण गतिविधियों में स्थानीय समुदाय, स्वयंसेवी संगठनों और इच्छुक नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी विशेष बल दिया, ताकि अभियान जनभागीदारी का स्वरूप ग्रहण कर सके। प्रभारी सचिव ने बैठक के उपरांत पुराने कलेक्ट्रेट भवन को हेरिटेज भवन के रूप में विकसित किए जा रहे कार्यों का निरीक्षण किया।
उन्होंने कार्यदायी संस्था को निर्माण कार्य गुणवत्ता मानकों के अनुरूप एवं समयबद्ध ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही भवन की ऐतिहासिक पहचान और मूल स्वरूप को संरक्षित रखने पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने आगंतुकों की सुविधा के लिए परिसर में पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था विकसित करने के निर्देश भी दिए। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अशोक जोशी, डीएफओ गढ़वाल महातिम यादव, सिविल एवं सोयम पवन सिंह नेगी, अपर जिलाधिकारी एफ आर चौहान आदि शामिल रहे।

